रतिया: शक्ति नाटक क्लब रतिया द्वारा हर वर्ष की तरह बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरुद्वारा ग्राउंड, शक्ति नगर रतिया में आयोजित भव्य रामलीला में रविवार रात्रि को दूसरे दिन भगवान श्री राम के जन्म का दृश्य दिखाया गया वही दूसरे दिन का शुभारंभ खाटू श्याम मंदिर सेवा ट्रस्ट के प्रधान राजू करण्डी वाले द्वारा ज्योत प्रजलवित करके किया तथा गण मान्य अतिथि के तहत पंचनंद स्मारक समिति के प्रधान रोहित चुघ, विनोद डोडा, सोनू मंगला, विन्नी वधवा, डॉ नीरज कटारिया ,विक्की मेहता,सोमनाथ लोहे वाले, मां की रसोई के संचालक राजू पपरेजा, टिंकू दहुजा,रमेश मेहता,राजू चुघ, शंटी गाबा,पिंचु नागपाल सहित अन्यों ने शिरकत की जिन्हे शक्ति नाटक क्लब के प्रधान राजेश सेतिया व अन्य सदस्यों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
राजा दशरथ के दरबार का भव्य दृश्य
रामलीला मंचन के दूसरे दिन दिखाया गया कि किस तरह अयोध्या के राजा दशरथ का दरबार राजसी वैभव से सजा होता है। सिंहासन पर विराजमान राजा दशरथ के दोनों ओर मंत्री, सभासद और राजपुरोहित गुरु वशिष्ठ बैठे दिखाई देते हैं। दरबार में राज्य की समृद्धि और सुख-शांति होने के बावजूद राजा दशरथ के चेहरे पर उदासी और चिंता साफ झलकती है।
संतान प्राप्ति की चिंता में व्याकुल राजा दशरथ
राजा दशरथ के पास विशाल राज्य, अपार संपत्ति और प्रजा का प्रेम है, लेकिन संतान न होने के कारण उनका मन व्यथित रहता है। उन्हें चिंता सताती है कि उनके बाद अयोध्या के राजवंश और राज्य का उत्तराधिकारी कौन होगा। वंश के उत्तराधिकारी के अभाव से वे अत्यंत चिंतित रहते थे।इस विषय पर उन्होंने अपने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ से परामर्श लिया। महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें आश्वस्त करते हुए पुत्रेष्टि यज्ञ (पुत्रकामेष्टि यज्ञ) कराने का सुझाव दिया और कहा कि इस यज्ञ को विधिपूर्वक संपन्न कराने के लिए महर्षि ऋष्यश्रृंग को आमंत्रित किया जाए।राजा दशरथ के निमंत्रण पर महर्षि ऋष्यश्रृंग अयोध्या पधारे। सरयू नदी के तट पर अत्यंत भव्य यज्ञ मंडप तैयार किया गया।
महर्षि ऋष्यश्रृंग के सान्निध्य में पुत्रेष्टियज्ञका समांपन
महर्षि ऋष्यश्रृंग के मुख्य आचार्यत्व में और महर्षि वशिष्ठ की देखरेख में पुत्रेष्टि यज्ञ विधि-विधान से आरंभ हुआ।यज्ञ की पूर्णाहूति के समय यज्ञकुंड से साक्षात अग्निदेव एक दिव्य पात्र (स्वर्ण पात्र) लेकर प्रकट हुए। उस पात्र में देवताओं द्वारा तैयार किया गया दिव्य अमृतमय खीर था। राजा दशरथ ने उस दिव्य खीर को अपनी तीनों रानियों में बाँटा और उसके पश्चात भगवान श्री राम , भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
Reported By: Rimpi Jindal












