रामपुर जेल से बाहर आते ही आजम खान पर ईडी का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हिरासत

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान को एक बार फिर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह रामपुर जेल से बाहर आए ही थे कि प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया। जांच अधिकारियों के अनुसार, अब उन्हें गाजियाबाद की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस घटनाक्रम से उनकी रिहाई के बाद मिली राहत कुछ ही समय में खत्म हो गई। जेल से निकलने के बाद आजम खान ने अपनी स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि कानून का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम होने और बच्चों की शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय तथा स्कूल बनवाना उनका अपराध है।

जौहर ट्रस्ट की संपत्तियों पर पहले ही हो चुकी है कार्रवाई

ईडी की जांच का एक बड़ा हिस्सा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और उससे जुड़ी जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्तियों पर केंद्रित है। एजेंसी ने विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों सहित 426.46 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है। इनकी बाजार कीमत करीब 1,170 करोड़ रुपये बताई गई है। रामपुर के सिंहनखेड़ा गांव में स्थित विश्वविद्यालय परिसर ट्रस्ट के नाम पर दर्ज है। इस ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और जांच एजेंसी के अनुसार उस पर उनका नियंत्रण रहा है। आजम खान विश्वविद्यालय के मानद चांसलर भी हैं।

किसानों की कृषि भूमि को लेकर गंभीर आरोप

ईडी ने धनशोधन निवारण कानून यानी PMLA के तहत जांच रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकियों के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की खेती योग्य जमीन पर दबाव डालकर कब्जा किया गया। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में सिंहनखेड़ा गांव की लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति से जुड़े 45 भूखंडों पर कथित अवैध कब्जे का भी उल्लेख किया गया। आरोप है कि इन जमीनों का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर के लिए हुआ। गृह मंत्रालय की ओर से नियुक्त कस्टोडियन द्वारा ट्रस्ट की लीज रद्द किए जाने के बाद संबंधित भूमि का कब्जा प्रशासन के माध्यम से वापस लिया जा चुका है।

सरकारी धन को निजी संस्थान तक पहुंचाने का आरोप

जांच एजेंसी को संदेह है कि सार्वजनिक विकास कार्यों के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। आरोपों के मुताबिक, सरकारी परियोजनाओं के ठेके लेने वाले कुछ ठेकेदारों से भुगतान का हिस्सा ट्रस्ट को दान के रूप में वापस दिलवाया गया। ईडी ने PMLA की धारा 66(2) के तहत मिली जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की थी। इसके बाद 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में प्राथमिकी संख्या 0224/2026 दर्ज हुई। इसमें आजम खान, ट्रस्ट और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।

मकान गिराने और लूटपाट से जुड़े पुराने मामले भी जांच में

ईडी रामपुर पुलिस की ओर से दर्ज 28 अन्य प्राथमिकियों की भी पड़ताल कर रही है। इनमें वर्ष 2016 के दौरान कई परिवारों के मकान गिराए जाने के आरोप शामिल हैं। शिकायतों के मुताबिक, वक्फ संपत्तियों पर किराये से रहने वाले परिवारों के घर बुलडोजर से ध्वस्त किए गए। आरोप यह भी हैं कि लोगों के साथ मारपीट हुई, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी गई और नकदी, आभूषण तथा पशु छीन लिए गए। कुछ शिकायतों में मकानों का मलबा ट्रकों के जरिए जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाने की बात भी कही गई है। इन मामलों में पुलिस पहले ही कई आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है।

नगर पालिका की मशीनें विश्वविद्यालय पहुंचाने की जांच

जांच के दायरे में रामपुर नगर पालिका से जुड़ा एक मामला भी शामिल है। पुलिस की प्राथमिकी और आरोपपत्रों में दावा किया गया है कि स्थानीय निकाय के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी को कथित तौर पर विश्वविद्यालय परिसर में भेज दिया गया था। ईडी अब इन सभी मामलों में धन के स्रोत, कथित लेन-देन और संपत्तियों के इस्तेमाल की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

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