वृंदावन: कार्तिक मास में ठाकुरजी की आराधना और नियम सेवा के लिए वृंदावन में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया है। देश-विदेश से आने वाले कृष्ण भक्त मंदिरों में दर्शन करने के साथ ही ब्रजमंडल की परिक्रमा और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी में जुटे हैं। इस्कॉन मंदिर में विदेशी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, अब तक एक हजार से अधिक विदेशी कृष्ण भक्त वृंदावन पहुंच चुके हैं। अगले तीन दिनों में इनकी संख्या तीन हजार तक पहुंचने की संभावना है।
कार्तिक मास का वैष्णव परंपरा में विशेष महत्व
कार्तिक मास को वैष्णव परंपरा में साधना, भक्ति और सेवा के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु पूरे महीने नियमों का पालन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हैं। गौड़ीय वैष्णव परंपरा से जुड़े भक्तों के लिए इस मास का विशेष महत्व है। श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन, संकीर्तन, जप, परिक्रमा और दीपदान जैसे धार्मिक कार्यों में भाग लेते हैं। शरद पूर्णिमा से नियम सेवा की शुरुआत करने की परंपरा है, जबकि बड़ी संख्या में भक्त एकादशी से भी संकल्प लेकर साधना आरंभ करते हैं।
इस्कॉन मंदिर में विदेशी भक्तों का आगमन और व्यवस्था
इस्कॉन मंदिर के जनसंपर्क अधिकारी रवि लोचन दास ने बताया कि कार्तिक मास में नियम सेवा के लिए विदेशी कृष्ण भक्तों का वृंदावन पहुंचना शुरू हो गया है। आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ेगी। भक्त ब्रजमंडल की परिक्रमा करने के साथ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। मंदिर परिसर में कार्तिक मास के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और आरती की व्यवस्था की जा रही है, ताकि श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव के साथ नियम सेवा कर सकें।
दामोदर आरती और दीपदान की विशेष व्यवस्था
उन्होंने बताया कि 26 अक्टूबर से मंदिर में प्रतिदिन मंगला आरती और शाम को दामोदर आरती आयोजित की जाएगी। शाम की आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दीपदान करेंगे। कार्तिक मास में भगवान दामोदर की आराधना और दीपदान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन की ओर से निशुल्क दीपक उपलब्ध कराए जाएंगे। कार्तिक मास के दौरान वृंदावन में बढ़ने वाली भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर गतिविधियां तेज होने लगी हैं।
Reported By: Prem Kaushik












