नई दिल्ली: 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन वैश्विक कूटनीति के एक नए और ऐतिहासिक अध्याय के साथ हुआ है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकातों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शिखर सम्मेलन खत्म होने के बाद क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) की तरफ से आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की गई है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करवाने और शांति वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद की पेशकश की है।
डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों के बीच भारत-चीन की रणनीतिक पहल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन अब तक ठोस सफलता नहीं मिली है। ऐसे में भारत की भूमिका पर दुनिया की नजरें हैं, क्योंकि रूस के साथ उसके ऐतिहासिक और मजबूत संबंध हैं।
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के संबंध और मजबूत करने पर सहमति बनी। पुतिन ने ब्रिक्स को पश्चिमी दबाव से मुक्त होकर वैश्विक विकास का नया मंच बनाने पर जोर दिया।
युद्ध रोकने आगे आए पीएम मोदी और जिनपिंग
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दोनों एशियाई महाशक्तियों की इस पहल का स्वागत करते हुए बताया कि राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मंशा की सराहना की है। पेसकोव के अनुसार, द्विपक्षीय बैठकों के दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में गहरी दिलचस्पी दिखाई और सक्रिय भूमिका निभाने का प्रस्ताव रखा।
इसके जवाब में राष्ट्रपति पुतिन ने दोनों राष्ट्रध्यक्षों को जमीनी स्थिति और यूक्रेन के मौजूदा हालात के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग की एक मुस्कुराती हुई तस्वीर भी सामने आई, जिसमें तीनों नेता एक-दूसरे का हाथ थामे नजर आ रहे हैं। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह तस्वीर अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक बड़ा रणनीतिक संदेश है।
अक्टूबर में तीन-तरफा बातचीत के आसार
रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में अन्य कूटनीतिक रास्ते भी तलाशने की बातें सामने आ रही हैं। रूसी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक क्रेमलिन ने इस बात के संकेत दिए हैं कि यूरोप के इस बड़े संकट को समाप्त करने के लिए यूक्रेन और अमेरिका के साथ तीन-तरफा (त्रिपक्षीय) वार्ता आगामी अक्टूबर महीने में हो सकती है। प्रवक्ता पेसकोव ने साफ किया कि रूस आने वाले समय में ऐसी किसी भी संभावना से इनकार नहीं करता। दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दिसंबर में मियामी में होने वाले G20 सम्मेलन के दौरान पुतिन से मिलने की इच्छा जताई थी, लेकिन पेसकोव ने फिलहाल इस संभावना को खारिज कर दिया है।












