जापान में फिर आया तेज भूकंप, रिक्टर स्केल पर 6.0 रही तीव्रता, क्या सुनामी का भी है खतरा?

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नई दिल्ली: जापान में रविवार तड़के धरती कांपने से लोगों में हलचल मच गई। देश में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.0 दर्ज की गई। झटके 1 नवंबर को सुबह 3 बजकर 45 मिनट पर महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र जापान के शिमा से 58 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में बताया गया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अभी तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।

भूकंप के बाद स्थानीय लोगों में कुछ समय के लिए डर का माहौल रहा। राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्टों में सुनामी की कोई चेतावनी जारी होने की जानकारी नहीं है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। इससे पहले 25 अक्टूबर को भी जापान में भूकंप आया था। उस समय इसकी तीव्रता 6.3 मापी गई थी और इसका केंद्र बोनिन द्वीप समूह के आसपास बताया गया था। जापान का यह क्षेत्र प्रशांत महासागर में स्थित है और यहां अक्सर भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं।

जापान में क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

जापान प्रशांत महासागर के उस हिस्से में आता है, जहां कई टेक्टोनिक प्लेटें एक-दूसरे के संपर्क में हैं। यह इलाका ‘पैसिफिक रिंग ऑफ फायर’ के नाम से जाना जाता है। दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में इसकी गिनती होती है। इसी वजह से जापान और इसके आसपास के समुद्री इलाकों में अक्सर धरती हिलने की घटनाएं सामने आती हैं। भूकंप के खतरे को देखते हुए जापान में आपदा से निपटने के लिए सख्त सुरक्षा नियम और आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं।

क्यों आता है भूकंप?

पृथ्वी की बाहरी परत कई बड़ी और छोटी प्लेटों से बनी है। ये प्लेटें लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे जाती हैं या उनके किनारे रगड़ खाते हैं, तो उनके बीच दबाव जमा होने लगता है। यह दबाव अचानक निकलता है तो धरती में कंपन पैदा होता है, जिसे भूकंप कहा जाता है।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर बताई जाती है। आम तौर पर 7 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि 4.5 या उससे अधिक तीव्रता के झटकों से कमजोर इमारतों को नुकसान होने की आशंका रहती है। 2.0 या इससे कम तीव्रता वाले भूकंप को माइक्रो भूकंप कहा जाता है। ऐसे झटके अक्सर लोगों को महसूस भी नहीं होते।

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