नई दिल्ली: आसमान में उड़ता एक विमान, अचानक कॉकपिट में चाकू से हमला, और महज 30 सेकंड में 14,000 फीट की खतरनाक गिरावट। यह किसी फिल्म का सीन नहीं, बल्कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हकीकत में घटी वह घटना है, जिसने 170 से ज्यादा यात्रियों की जिंदगी को मौत के मुंह से वापस खींच लिया। और इस पूरे ऑपरेशन के हीरो बने भारतीय मूल के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार, जिनकी बहादुरी की तारीफ अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक कर रहे हैं।
यह पूरी घटना बोइंग 737 मैक्स 8 विमान के भीतर हुई, जहां कैप्टन और को-पायलट के बीच अचानक हिंसक झड़प शुरू हो गई। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक को-पायलट ने कैप्टन पर चाकू से हमला कर दिया, जिसके बाद विमान अचानक ऊंचाई खोने लगा। एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि को-पायलट ओमान का नागरिक था, जिसने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक विमान महज 30 सेकंड के भीतर करीब 14,000 फीट नीचे आ गया, जिससे विमान में सवार सभी लोगों की जान खतरे में पड़ गई।
यात्रियों ने कैसे बचाई अपनी जान
जैसे ही विमान तेजी से नीचे गिरने लगा, यात्रियों ने कॉकपिट से आती चीख-पुकार सुनी और वे तुरंत उस दिशा में दौड़ पड़े। नेतन्याहू के मुताबिक विमान पूरी तरह टेलस्पिन में चला गया था और बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर जा रहा था। ठीक इसी वक्त कुछ यात्री और एक क्रू मेंबर कॉकपिट के अंदर घुसे और देखा कि को-पायलट जानबूझकर विमान के सिस्टम को खराब करने की कोशिश कर रहा है।
इजरायल लौटने के बाद यात्री यानिव ने नेतन्याहू को पूरी घटना विस्तार से बताई। उनके मुताबिक गंभीर रूप से घायल भारतीय कैप्टन ने गिरने से ठीक पहले किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिससे यात्री अंदर जाकर हमलावर को काबू में कर सके। यानिव ने बताया कि आरोपी विमान को पूरी तरह बेकाबू करने के लिए कंट्रोल सिस्टम तोड़ने की कोशिश कर रहा था। इसके बाद विमान में मौजूद अन्य पायलटों ने कमान संभाली, विमान को स्थिर किया और आखिरकार उसे सऊदी अरब के तबूक शहर में सुरक्षित उतार लिया गया।
नेतन्याहू ने की दिल खोलकर तारीफ
इस साहसिक घटना के बाद नेतन्याहू ने एक्स पर लिखा कि वे कैप्टन की असाधारण बहादुरी को सलाम करते हैं। उनके मुताबिक गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन लड़ते रहे, जिसकी वजह से विमान में सवार 174 लोगों की जान बच सकी, जिनमें इजरायली नागरिकों के साथ-साथ कई अन्य देशों के यात्री भी शामिल थे। उन्होंने कैप्टन के जल्द स्वस्थ होने की कामना भी जताई।
भारत में इजरायल के राजदूत ने भी कैप्टन को अनुभवी और काबिल हीरो करार दिया। उनके मुताबिक कैप्टन के साथ-साथ अन्य इजरायली और अमीराती यात्रियों और क्रू के साहस ने मिलकर 180 लोगों की जिंदगी बचाई। भारत सरकार ने भी इस साहसिक कार्य के लिए कैप्टन को सलाम किया, जबकि इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इसे एक ऐसी मिसाल बताया, जहां अलग-अलग देशों के लोगों ने मिलकर समान साहस दिखाया।
इजरायली नेता ने की खास पहल की घोषणा
इजरायल एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ने भी कैप्टन स्मित मच्छार और पूरी फ्लाइट क्रू का आभार जताया और उन्हें यात्रियों की जान बचाने वाला बहादुर बताया। वहीं इजरायली राजनेता और पूर्व पुलिस अधिकारी अलमोग कोहेन ने कैप्टन मच्छार को “आज के इजरायल का हीरो” बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी सूझबूझ से कॉकपिट का दरवाजा खुलवाकर करीब 200 लोगों की जान बचाने में मदद की।
कोहेन ने यह भी घोषणा की कि वे इजरायल की संसद नेसेट में बेन गुरियन एयरपोर्ट के किसी लाउंज का नाम कैप्टन मच्छार के सम्मान में रखने के लिए विधेयक पेश करेंगे। उन्होंने कैप्टन के परिवार और माता-पिता को भी शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें यह सिखाया है कि इंसानी जान बचाना सबसे बड़ा मूल्य है।
ट्रंप ने भी कैप्टन को बताया हीरो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू से हुई बातचीत को याद करते हुए कहा कि पायलट की हालत बेहद गंभीर थी, लेकिन उसने समझदारी से काम लिया और एक तरह से वह सच में हीरो साबित हुआ। ट्रंप के मुताबिक पायलट ने दरवाजा खोला, पीछे की ओर गिर गया, लेकिन फिर भी मदद के लिए चिल्लाता रहा। को-पायलट को लेकर ट्रंप ने कहा कि ऐसा लगता है कि वह या तो आतंकवादी था या फिर मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति, जिसने पायलट पर चाकू से हमला किया।
कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार
गुजराती मूल के कैप्टन स्मित मच्छार को कमर्शियल एविएशन में दस साल से ज्यादा का अनुभव है। वे जून 2022 में फ्लाईदुबई में डायरेक्ट एंट्री कैप्टन के तौर पर शामिल हुए थे, इससे पहले वे जून 2011 से 2022 तक करीब 11 साल स्पाइसजेट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वे बोइंग 737 के विशेषज्ञ माने जाते हैं और हमेशा सुरक्षा नियमों का पूरा ध्यान रखते हैं। इसके अलावा वे अन्य पायलटों को मार्गदर्शन भी देते रहे हैं। उन्होंने वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई पूरी की है।
भारतीय दूतावास रख रहा है नजर
रियाद स्थित भारतीय दूतावास और जेद्दा का वाणिज्य दूतावास लगातार कैप्टन की सेहत पर नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल वे तबूक के अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। दूतावास के मुताबिक उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार है। दूतावास कैप्टन के परिवार के साथ भी लगातार संपर्क में है और सऊदी अधिकारियों के साथ पूरा तालमेल बिठा रहा है।
फ्लाईदुबई का बड़ा फैसला
इस पूरी घटना के बाद फ्लाईदुबई ने अपने एक बयान में कहा है कि जांच पूरी होने तक इजरायल आने-जाने वाली उसकी सभी उड़ानें रोक दी गई हैं। कंपनी का कहना है कि वह सरकारी अधिकारियों, नियामकों और एयरपोर्ट से जुड़े पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है, और जैसे-जैसे नई जानकारी सामने आएगी, वह इस रोक की समीक्षा करती रहेगी।












