नई दिल्ली: भारत में इंटरनेट की दुनिया में जल्द एक नया बदलाव देखने को मिल सकता है। अब तक ज्यादातर घरों तक इंटरनेट पहुंचाने के लिए मोबाइल नेटवर्क या फाइबर केबल का इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन अब सैटेलाइट के जरिए भी हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने की तैयारी है। इस क्षेत्र में मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक प्रमुख दावेदार हैं। दोनों कंपनियों की सेवाएं शुरू होने के बाद खासतौर पर उन इलाकों के लोगों को फायदा मिल सकता है, जहां अभी तक अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं पहुंच पाई है। हालांकि, भारतीय ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा सवाल इसकी कीमत और इंटरनेट की स्पीड को लेकर है।
सैटेलाइट इंटरनेट के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस
भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन यानी SATCOM सेवाओं के लिए तीन कंपनियों को लाइसेंस दिया गया है। इनमें रिलायंस जियो, एलन मस्क की स्टारलिंक और एयरटेल समर्थित वनवेब शामिल हैं।
इन कंपनियों को अपनी सेवाएं शुरू करने से पहले कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इनमें सुरक्षा संबंधी मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया शामिल है। इसके बाद ही व्यावसायिक स्तर पर सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
जियो के फाइबर इंटरनेट की शुरुआती कीमत
फिलहाल भारत में जियो और एयरटेल जैसी कंपनियां फाइबर केबल के जरिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट उपलब्ध करा रही हैं। जियो के शुरुआती ब्रॉडबैंड प्लान की कीमत 599 रुपये से शुरू होती है। इस प्लान में 100 Mbps तक की इंटरनेट स्पीड मिलती है।
फाइबर इंटरनेट में घर तक केबल बिछाकर कनेक्शन दिया जाता है। जहां यह सुविधा आसानी से उपलब्ध है, वहां ग्राहकों को पहले से ही किफायती दरों पर इंटरनेट मिल रहा है।
स्टारलिंक के अमेरिका वाले प्लान की कीमत कितनी?
भारत में स्टारलिंक की सर्विस की कीमत अभी घोषित नहीं हुई है। हालांकि, कंपनी दूसरे देशों में अपनी सेवाएं दे रही है। अमेरिका के शिकागो में स्टारलिंक का शुरुआती रेजिडेंशियल प्लान 60.50 डॉलर यानी करीब 5,600 रुपये प्रति महीने का है। इसमें 100 Mbps की इंटरनेट स्पीड मिलती है।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सैटेलाइट इंटरनेट की कीमत पारंपरिक फाइबर ब्रॉडबैंड के मुकाबले ज्यादा हो सकती है। हालांकि, भारत में लॉन्च होने पर इसकी कीमत अलग हो सकती है।
इंस्टॉलेशन में भी हो सकता है बड़ा अंतर
फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्शन में कंपनियां कई बार तीन महीने के प्लान के साथ इंस्टॉलेशन मुफ्त देती हैं। वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट के लिए घर की छत पर एक विशेष टर्मिनल लगाना पड़ता है, जो सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है।
स्टारलिंक के अमेरिकी पोर्टल के मुताबिक, वहां हार्डवेयर के लिए अलग शुरुआती भुगतान नहीं लिया जाता, लेकिन सर्विस बंद करने पर उपकरण वापस करना होता है। इसके अलावा प्रोफेशनल इंस्टॉलेशन का शुल्क 99 डॉलर यानी करीब 9,000 रुपये है। भारत में ये शुल्क अलग हो सकते हैं।
कैसे काम करता है सैटेलाइट इंटरनेट?
सैटेलाइट इंटरनेट में जमीन के नीचे फाइबर केबल बिछाने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट सिग्नल भेजे जाते हैं।
स्टारलिंक के मामले में घर की छत पर एक विशेष टर्मिनल लगाया जाता है। यह टर्मिनल अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त करता है। इसके बाद केबल के जरिए इसे वाई-फाई राउटर से जोड़ा जाता है, जिससे घर के अंदर इंटरनेट इस्तेमाल किया जा सकता है।
पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों को होगा फायदा
सैटेलाइट इंटरनेट का सबसे बड़ा फायदा उन जगहों पर देखने को मिल सकता है, जहां फाइबर केबल पहुंचाना मुश्किल है। देश के पहाड़ी, सीमावर्ती और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इससे बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी मिल सकती है।
इसके अलावा ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों, छोटे कारोबारियों और उन लोगों को भी फायदा होगा, जिन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए इंटरनेट की जरूरत पड़ती है।
जियो और एयरटेल के सामने होगी नई चुनौती
भारत में जियो और एयरटेल पहले से ही ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट के बड़े खिलाड़ी हैं। देश में इंटरनेट की कीमतें भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले काफी कम हैं। ऐसे में स्टारलिंक के लिए भारतीय बाजार में अपनी जगह बनाना आसान नहीं होगा।
भारतीय ग्राहकों के लिए सिर्फ नई तकनीक मायने नहीं रखेगी, बल्कि कीमत, इंटरनेट स्पीड और सर्विस की विश्वसनीयता भी अहम होगी। फिलहाल जियो और स्टारलिंक की भारतीय सेवाओं की वास्तविक कीमत सामने आने का इंतजार है।












