नई दिल्ली: आज 3 अक्टूबर, शनिवार को जितिया यानी जीवित्पुत्रिका व्रत है। माताएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और खुशहाल जीवन के लिए रखती हैं। इस दिन वे बिना अन्न-जल के उपवास करती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करती हैं। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में यह व्रत बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
जितिया व्रत आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस बार अष्टमी 3 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू हुई है और 4 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और प्रदोष काल को देखते हुए मुख्य व्रत आज ही रखा जा रहा है। कल 2 अक्टूबर को नहाय-खाय की रस्म निभाई गई थी। आज महिलाएं निर्जला उपवास करेंगी और कल यानी 4 अक्टूबर को पारण के साथ व्रत पूरा होगा।
पूजा का शुभ समय
भगवान जीमूतवाहन की मुख्य पूजा शाम को प्रदोष काल में की जाती है। आज यह समय करीब 6 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। इसी बीच व्रत कथा सुनी जाती है और आरती की जाती है। व्रत का संकल्प लेने के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक है। अलग-अलग शहरों में मुहूर्त के समय में थोड़ा फर्क हो सकता है।
पूजा की सामग्री
सामग्री हर क्षेत्र और परिवार की परंपरा के हिसाब से बदल सकती है। आमतौर पर पूजा में ये चीजें इस्तेमाल होती हैं जैसे-भगवान जीमूतवाहन की प्रतिमा या तस्वीर, कुश और गोबर, धूप और दीप, रोली, सिंदूर और अक्षत, फूल, फल और प्रसाद। कई जगहों पर महिलाएं घर के आंगन में छोटा-सा तालाब बनाकर उसमें जीमूतवाहन की पूजा करती हैं।
इस व्रत में राजा जीमूतवाहन की कथा सुनने की खास परंपरा है। मान्यता है कि उन्होंने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राण देने का संकल्प लिया था। उनके त्याग और दया की यही कहानी इस व्रत से जुड़ी है। व्रती महिलाएं कथा सुनकर अपनी संतान के सुखी और लंबे जीवन की प्रार्थना करती हैं।
कब होगा पारण
व्रत का पारण 4 अक्टूबर, रविवार को होगा। पंचांग के अनुसार सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद पारण किया जा सकता है। पूजा-पाठ करने के बाद महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं। ध्यान रहे कि व्रत के नियम और पूजा की रीति अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार ही पूजा करें।












