गुरुग्राम में नई सफाई मशीन ने सोशल मीडिया पर छेड़ी अलग तरह की चर्चा

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गुरुग्राम में शहर की सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की कोशिश के तहत एक छोटी कचरा उठाने वाली मशीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग इसकी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा करने लगे। वीडियो में एक सफाईकर्मी सड़क किनारे छोटी गाड़ी जैसी मशीन के साथ दिखाई देता है। उसके हाथ में लगी मोटी पाइप के जरिए रैपर, कागज और दूसरे हल्के कचरे को मशीन के भीतर खींचा जाता नजर आ रहा है। मशीन पर नगर निगम गुरुग्राम यानी एमसीजी का निशान भी दिखाई देता है। वीडियो में मशीन का इस्तेमाल देखकर लोगों ने इसे शहर की सफाई में तकनीक के इस्तेमाल से जोड़कर देखा।

बड़े वाहनों से अलग है इस मशीन का इस्तेमाल

यह मशीन बड़े सफाई वाहनों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उन स्थानों पर काम करने के लिए लाई गई है जहां बड़े वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। बाजारों, फुटपाथों के किनारे और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पड़े हल्के कचरे को इकट्ठा करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों की ओर से इसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। शुरुआती चरण में ऐसी पांच मशीनें लाई गई हैं। इनका उद्देश्य सफाई कर्मचारियों को कागज, प्लास्टिक रैपर और छोटे कचरे को तेजी से इकट्ठा करने में सहायता देना बताया गया है।

‘ऑटोमेटिक’ शब्द बना सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा मुद्दा

वीडियो वायरल होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा मशीन के ‘ऑटोमेटिक’ होने को लेकर हुई। वीडियो में कर्मचारी खुद पाइप को कचरे की तरफ ले जाता और मशीन को संचालित करता दिखाई देता है। इसी वजह से कई यूजर्स ने सवाल किया कि जब कचरा उठाने के लिए कर्मचारी को खुद पाइप चलानी पड़ रही है, तो इसे पूरी तरह ऑटोमेटिक कैसे कहा जा सकता है। कुछ लोगों ने इसकी तुलना बड़े वैक्यूम क्लीनर से की। वहीं कुछ यूजर्स का कहना था कि मशीन पूरी तरह स्वचालित न सही, लेकिन अगर यह कर्मचारी को कचरा उठाने में सहायता देती है तो इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है।

कुछ यूजर्स ने तकनीक को बताया मददगार

सोशल मीडिया पर मशीन को लेकर केवल मजाक या आलोचना ही देखने को नहीं मिली। कुछ लोगों ने इसके इस्तेमाल को सफाई व्यवस्था में तकनीकी बदलाव की दिशा में कदम बताया। उनका तर्क था कि छोटी मशीन होने के कारण इसे उन जगहों पर आसानी से ले जाया जा सकता है जहां बड़े सफाई वाहन नहीं पहुंच सकते। खासकर बाजारों और संकरी जगहों में सड़क किनारे पड़ा हल्का कचरा उठाने में यह उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक उपयोगिता का आकलन लंबे समय तक इस्तेमाल और उसके परिणामों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था फिर चर्चा में

गुरुग्राम में सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। शहर में लगातार बढ़ती आबादी, व्यावसायिक गतिविधियों और यातायात के बीच सार्वजनिक जगहों पर कचरा प्रबंधन नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण काम बना हुआ है। इसी वजह से अलग-अलग इलाकों में सफाई के लिए मशीनों और नई तकनीकों का प्रयोग किया जाता रहा है। नई वेस्ट पिकर मशीन भी इसी प्रयास का हिस्सा बताई जा रही है। शुरुआती दौर में इसे व्यस्त बाजारों और ऐसे स्थानों पर इस्तेमाल किया जा रहा है जहां नियमित सफाई के दौरान छोटे कचरे को उठाना चुनौती बनता है।

अब असली सवाल मशीन के नतीजों पर रहेगा

गुरुग्राम की इस मशीन का वीडियो भले ही सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाओं की वजह बन गया हो, लेकिन इसकी सफलता का फैसला जमीन पर होने वाले काम से होगा। अगर मशीन कम समय में अधिक हल्का कचरा इकट्ठा करने में मदद करती है और सफाई कर्मचारियों की मेहनत घटाती है, तो इसका उद्देश्य पूरा माना जा सकता है। दूसरी ओर, अगर इसके संचालन में उतनी ही मेहनत लगती है जितनी पारंपरिक सफाई में, तो इसकी उपयोगिता पर सवाल बने रहेंगे। फिलहाल यह मशीन पायलट स्तर पर इस्तेमाल की जा रही है और आने वाले समय में इसके प्रदर्शन से साफ होगा कि गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था में यह तकनीक कितनी कारगर साबित होती है।

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