नई दिल्ली: 1 सितंबर की रात जब लोग गहरी नींद में सो रहे थे, तभी भारत से लेकर अफगानिस्तान तक के एक बड़े भूभाग में अचानक हलचल शुरू हो गई। देखते ही देखते कई इलाकों में धरती थर्रा उठी। अफगानिस्तान में जहां कुछ ही घंटों के भीतर एक के बाद एक कई झटके महसूस किए गए, वहीं भारत के जम्मू-कश्मीर और सिक्किम जैसे पर्वतीय राज्यों में भी देर रात भूकंप के झटकों ने लोगों को खौफजदा कर दिया। गनीमत यह रही कि इन झटकों की तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, जिससे किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन अचानक हिली जमीन ने हर किसी के दिल में दहशत भर दी।
भारत के दो राज्यों में भी महसूस हुई हलचल
भारत के किश्तवाड़ और मंगन में भी देर रात भूमिगत हलचल दर्ज की गई। सिक्किम के मंगन जिले में रात 1:48 बजे 3.9 तीव्रता का भूकंप आया। 1:54 बजे जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में भी 2.4 तीव्रता के हल्के झटके महसूस हुए।
झटके काफी हल्के थे, रात के सन्नाटे में खिड़कियों और सामान के हिलने से कई लोगों की नींद उड़ गई और वे बदहवास होकर अपने घरों से बाहर निकल आए।
प्राकृतिक आपदाओं के बीच बढ़ा खौफ
पहाड़ी क्षेत्रों में यह हलचल ऐसे समय में हुई है जब पड़ोसी देश नेपाल पहले से ही कुदरत की भीषण मार झेल रहा है। हाल ही में वहां आई तबाही और बाढ़ के कारण 900 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। नुवाकोट और रसुवा जैसे जिले पूरी तरह तबाह हो चुके हैं।
इस क्षेत्र में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं और अचानक कांपती धरती ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों में गहरी चिंता और डर पैदा कर दिया है। फिलहाल प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
अफगानिस्तान में तीन बार डोली जमीन
नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंपीय गतिविधियों का सबसे ज्यादा असर अफगानिस्तान में देखा गया। यहां रात करीब 1:06 बजे पहला झटका लगा, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.4 दर्ज की गई। इसका केंद्र जमीन से 132 किलोमीटर गहराई में था। लोग इस झटके से संभल भी नहीं पाए थे कि तड़के 3:14 बजे फैजाबाद से 99 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में 3.7 तीव्रता का दूसरा झटका आया। इसके महज 17 मिनट बाद, यानी 3:31 बजे काबुल से 105 किलोमीटर पूर्व में 4.2 की तीव्रता से धरती एक बार फिर कांप उठी। झटके काफी हल्के थे, रात के सन्नाटे में खिड़कियों और सामान के हिलने से कई लोगों की नींद उड़ गई और वे बदहवास होकर अपने घरों से बाहर निकल आए।












