नई दिल्ली: फ्रांस में महंगाई के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। शनिवार को देश के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं। इस दौरान दुकानों में लूटपाट और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। सबसे ज्यादा चर्चा लिमोज शहर के ऐतिहासिक टाउन हॉल की हो रही है, जो दो विश्व युद्धों के दौरान भी सुरक्षित रहा था, लेकिन इस बार प्रदर्शनकारियों की हिंसा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। 140 साल से अधिक पुराने इस भवन को शहर की ऐतिहासिक धरोहर माना जाता है।
महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन ने लिया हिंसक रूप
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन के खर्च को लेकर लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी सरकार की नीतियों और आर्थिक असमानता को लेकर भी थी। देखते ही देखते कई जगहों पर हालात बिगड़ गए। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग शामिल हुए। वहीं, सीजीटी ट्रेड यूनियन ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों के घायल होने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आईं।
कई शहरों में दुकानों और सरकारी इमारतों पर हमला
लिमोज के अलावा पेरिस, मार्सिले, लिले, बोर्डो, नैनटेस और टूलूज़ जैसे शहरों में भी तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। कई दुकानों को निशाना बनाया गया और कुछ जगहों पर वाहनों में आग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक इमारतों को भी नुकसान पहुंचाया। लिमोज के ऐतिहासिक टाउन हॉल को लगी आग ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद शहर की पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
राष्ट्रपति मैक्रों ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी कार्यालयों, दुकानों और नगर भवनों में तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि हिंसा और लूटपाट करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्षी नेताओं ने भी घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। कुछ नेताओं ने हिंसा की आलोचना की, जबकि कुछ ने सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठाए। कुल मिलाकर, महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ आंदोलन अब फ्रांस में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक तनाव का बड़ा मुद्दा बन गया है।











