नई दिल्ली: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान और धाकड़ सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना जब मैदान पर बल्ला संभालती हैं, तो दुनिया भर के गेंदबाजों के पसीने छूट जाते हैं। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और शांत मिजाज के लिए मशहूर मंधाना इस समय सुर्खियों में हैं। रविवार (13 सितंबर) को श्रीलंका के खिलाफ एशिया कप का खिताबी मुकाबला खेला जाना है, जहां पूरे देश को उनसे एक बड़ी और तूफानी पारी की उम्मीद है। हालांकि, इस अहम मैच से ठीक पहले स्मृति मंधाना का एक इंटरव्यू और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनके अंदर छुपा दर्द और गुस्सा साफ नजर आ रहा है।
शांत चेहरे के पीछे का गुस्सा और बेबाक अंदाज
स्मृति मंधाना ने स्वीकार किया कि लोग उन्हें भले ही शांत और सरल स्वभाव का मानते हों, लेकिन उनके भीतर काफी गुस्सा है। वह इसे जाहिर कर बदला लेने या मैदान पर संयम खोने में विश्वास नहीं रखतीं।
मंधाना ने कहा कि वह खुद को कभी कमजोर नहीं पड़ने देतीं और बेवजह की हमदर्दी नहीं चाहतीं। उनकी इच्छा है कि लोग उन्हें मैदान पर उनके प्रदर्शन से पहचानें, न कि सहानुभूति के नजरिए से देखें।
पर्सनल लाइफ के सवाल पर आंखों में आंसू
महिला टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 175 मुकाबले खेलकर 30.46 की औसत से 4,692 रन बना चुकीं स्मृति मंधाना मैदान के बाहर अपनी निजी जिंदगी को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखती आई हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान जब उनसे जिंदगी की सबसे मुश्किल रात के बारे में पूछा गया, तो वह कुछ पल के लिए शांत हो गईं। उस वक्त उनकी आंखों में नमी और चेहरे पर दर्द साफ महसूस किया जा सकता था। पर्सनल लाइफ से जुड़े सवालों और पलाश मुच्छल के साथ रिश्तों को लेकर उठी तमाम चर्चाओं के बीच उन्होंने बहुत ही समझदारी से जवाब दिया। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी पर ज्यादा न बोलते हुए सिर्फ क्रिकेट पर बात करने को प्राथमिकता दी। उन्होंने माना कि किसी वर्ल्ड कप के दौरान बीती रात और कोरोना का दौर उनकी जिंदगी के सबसे कठिन चरणों में से एक था।
‘बदला नहीं लेती, लेकिन बात भूलती भी नहीं’
जब पॉडकास्ट में उनसे पूछा गया कि क्या वह जिंदगी में लोगों को आसानी से माफ कर देती हैं, तो भारतीय उप-कप्तान ने बेहद सधा हुआ और दमदार जवाब दिया। मंधाना ने कहा, “मैं माफ कर सकती हूं, लेकिन भूलती कभी नहीं!” उनके इस बयान का सीधा संदेश है कि वह अतीत के कड़वे अनुभवों को भूलकर बिना किसी से उलझे आगे बढ़ना जानती हैं, लेकिन किसके साथ क्या रिश्ता रहा और किसने उनके साथ कैसा व्यवहार किया, इसकी याद हमेशा उनके जेहन में रहती है। एशिया कप के फाइनल से ठीक पहले मंधाना का यह रुख दिखाता है कि वह मानसिक रूप से कितनी मजबूत हैं और उनका पूरा ध्यान फिलहाल देश को ट्रॉफी जिताने पर टिका है।












