नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के दोरिमाल जंगल क्षेत्र में शनिवार को आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई. शुरुआती जानकारी के अनुसार, इलाके में 2 से 3 आतंकवादियों के छिपे होने की आशंका जताई जा रही है. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है.
आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर की फायरिंग
अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सेना और अन्य सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम जंगल क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चला रही थी. इसी दौरान छिपे आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से गोलीबारी तेज हो गई.
सुरक्षा एजेंसियां इलाके में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि आतंकियों को पकड़ने या मार गिराने में सफलता मिल सके. पहाड़ी और घने जंगल वाले इस क्षेत्र में ऑपरेशन सावधानी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है. सेना और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
इस घटना के बीच भारतीय सेना द्वारा हाल ही में किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क खत्म करने का दावा भी चर्चा में है. फरवरी महीने में सेना की व्हाइट नाइट कोर ने घोषणा की थी कि लंबे अभियान के बाद किश्तवाड़ में सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सात आतंकवादियों की तस्वीरें साझा करते हुए बताया था कि 326 दिनों के अभियान के बाद यह सफलता हासिल हुई.
सेना के अनुसार, मारे गए आतंकियों में जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था, जिसे किश्तवाड़ आतंकी हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता था. इस अभियान में भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और खुफिया एजेंसियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
सेना प्रमुख का कड़ा संदेश
इसी बीच सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश दिया है. हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान आतंकवादियों को समर्थन देना और भारत के खिलाफ गतिविधियां जारी रखता है, तो उसे तय करना होगा कि वह “भूगोल का हिस्सा बने रहना चाहता है या इतिहास का.”
उन्होंने यह बयान ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के मौके पर आयोजित ‘सेना संवाद’ कार्यक्रम में दिया. गौरतलब है कि पिछले वर्ष 7 मई को पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. इस दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित कई आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की थी. बाद में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा, जो करीब 88 घंटे तक चला और 10 मई को आपसी सहमति के बाद समाप्त हुआ.
















