नई दिल्ली: टेलीग्राम ग्रुप पर आसान ऑनलाइन टास्क और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के जरिए मोटा मुनाफा कमाने का सपना दिखाकर लोगों को जाल में फंसाने वाले अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का साउथ जिला साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में भेजकर आगे घुमाया जाता था और क्रिप्टोकरेंसी/यूएसडीटी के जरिए रकम को खपाने का प्रयास किया जाता था।
साउथ जिला डीसीपी अनंत मित्तल ने बताया कि मामला उस समय सामने आया जब एक पीड़ित ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि वह टेलीग्राम के जरिए साइबर ठगों के संपर्क में आया था। ठगों ने उसे ऑनलाइन टास्क करने और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने पर भारी मुनाफे का भरोसा दिलाया। झांसे में आए पीड़ित ने आरोपियों के बताए खातों में दो किस्तों में कुल 7 लाख 86 हजार 300 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इनमें 4 लाख 66 हजार 300 रुपये और 3 लाख 20 हजार रुपये की रकम शामिल थी। रकम पहुंचने के बाद न तो मुनाफा मिला और न ही मूलधन वापस किया गया। इसके बाद ठगों ने पीड़ित से संपर्क भी बंद कर दिया।
शिकायत के आधार पर ई-एफआईआर संख्या 0149/2025, धारा 318(4)/319/340 बीएनएस, थाना साइबर साउथ के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। इसके बाद साइबर पुलिस ने तकनीकी जांच और बैंक खातों के वित्तीय विश्लेषण को हथियार बनाया। रकम की आवाजाही की कड़ियां जोड़ते-जोड़ते पुलिस उन बैंक खातों तक पहुंची, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जा रहा था। जांच में एक म्यूल खाते में 4.66 लाख रुपये, जबकि दूसरे खाते में 5.22 लाख रुपये पहुंचने की जानकारी सामने आई।
उत्तराखंड में दबिश, दो आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान पुलिस टीम ने संदिग्ध बैंक खातों और डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके आधार पर करण बिस्वास और मोहित सरकार उर्फ मोनू को ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। दोनों का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है। जांच की अगली कड़ी पुलिस को विनय मंडल तक ले गई। वह पहले से ही थाना साइबर क्राइम, रोहतक हरियाणा के एक अन्य साइबर ठगी मामले में हिरासत में था। साउथ जिला साइबर पुलिस ने इस मामले में उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया और अदालत से तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड हासिल की।
कमीशन के बदले खुलवाए जाते थे म्यूल खाते
पुलिस के अनुसार आरोपी कथित तौर पर टेलीग्राम आधारित टास्क और क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पीड़ितों से रकम सीधे अपने खाते में लेने के बजाय म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों की व्यवस्था कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से कमीशन पर की जाती थी। ठगी की रकम इन खातों में पहुंचने के बाद उसे अलग-अलग खातों में भेजने, नकदी निकालने और क्रिप्टोकरेंसी/यूएसडीटी के जरिए आगे इस्तेमाल करने का प्रयास किया जाता था।
मोबाइल से लेकर बैंक पासबुक तक बरामद
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन, एक केनरा बैंक की पासबुक और साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य बरामद किए हैं। पुलिस इन उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तथा ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
इन पुलिसकर्मियों ने खोली ठगी की परतें
पूरी कार्रवाई इंस्पेक्टर हंसराज स्वामी एसएचओ थाना साइबर साउथ के नेतृत्व में की गई। टीम में एसआई राज कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल सुनील कुमार बैरवा और हेड कांस्टेबल राजकुमार बैरवा शामिल रहे। पूरी कार्रवाई एसीपी ऑपरेशंस बलराम सिंह बेनीवाल की निगरानी में हुई। साउथ जिला पुलिस के अनुसार मामले में आगे की जांच जारी है और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तथा वित्तीय लेनदेन की कड़ियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
Reported by – Pankaj Rai












