नई दिल्ली: मणिपुर में शांति की उम्मीद के बीच एक बार फिर हिंसा ने दस्तक दे दी है। महीनों तक कुकी और मैतेई समुदायों के बीच चले खूनी संघर्ष के बाद हालात सामान्य होते दिख रहे थे, लेकिन कामजोंग जिले में हुई ताजा घटना ने राज्य में फिर से तनाव बढ़ा दिया है। जानकारी के मुताबिक शनिवार देर रात कामजोंग जिले के पहाड़ी इलाके में बसे चस्साद गांव पर संदिग्ध उग्रवादियों ने हमला कर दिया।
हमलावरों ने कुकी समुदाय के करीब 15 घरों को आग के हवाले कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे गांव में दहशत फैल गई। अपनी जान बचाने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीणों को घर छोड़कर जंगलों में भागना पड़ा। कई परिवारों ने पास के आर्मी कैंप में शरण ली है।
एक दिन में दो बार हमला, एक की मौत, चार घायल
अधिकारियों ने बताया कि यह कोई पहला हमला नहीं था। इससे पहले शनिवार दिन में भी उग्रवादियों ने इसी गांव को निशाना बनाया था। उस हमले में एक कुकी नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि चार लोग गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लगातार दो हमलों से इलाके में डर का माहौल है।
सुरक्षा बल तैनात, सर्च ऑपरेशन शुरू
स्थानीय पुलिस के अनुसार स्थिति को काबू में करने के लिए असम राइफल्स, बीएसएफ और कामजोंग जिला पुलिस की संयुक्त टीम को मौके पर तैनात किया गया है। पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इसी बीच शनिवार रात कामजोंग जिला मुख्यालय में एक और हिंसक घटना सामने आई, जहां दूसरे समुदाय के उपद्रवियों के हमले में तीन तांगखुल नगा समुदाय के लोग घायल हो गए।
डिप्टी सीएम ने की निंदा, दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश
घटना पर मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चस्साद में हुई हिंसा की निंदा करते हुए इसे असहनीय अपराध बताया। डिप्टी सीएम ने कुकी नागरिक की मौत पर दुख जताया और घायल व विस्थापित परिवारों के प्रति चिंता व्यक्त की। उन्होंने जिला प्रशासन, राज्य पुलिस और सुरक्षा बलों को 24 घंटे अलर्ट रहने और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।












