एम्स के बाहर इंसानियत की मिसाल, जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया मदद का हाथ

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नई दिल्ली: बीमारी से जूझते मरीजों के लिए दवा और इलाज जितने जरूरी हैं उतना ही अहम मुश्किल वक्त में मिलने वाला सहयोग भी है। इसी मानवीय भावना को जमीन पर उतारते हुए ब्लोम्स इंटरनेशनल इंडिया ने राजधानी दिल्ली में सेवा और सद्भाव की ऐसी मिसाल पेश की जिसने इंसानियत का संदेश दिया। संगठन की ओर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 के बाहर जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को फल और जूस वितरित किए गए।

देश के कोने-कोने से लोग बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर एम्स पहुंचते हैं। इनमें अनेक मरीज और उनके परिजन आर्थिक कठिनाइयों के बीच अस्पताल में उपचार कराने को मजबूर होते हैं। ऐसे लोगों की मदद के उद्देश्य से आयोजित इस सेवा पहल के माध्यम से संगठन ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि संकट की घड़ी में किसी जरूरतमंद का सहारा बनना ही सच्ची इंसानियत है।

मानवता और इंसानियत के लिए कर रहा हूं काम

सामाजिक कार्यकर्ता साजिद ने कहा कि उनका उद्देश्य मानवता और इंसानियत की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान मरीज और उनके परिजन पहले ही मानसिक तथा आर्थिक परेशानियों से गुजरते हैं। ऐसे समय में छोटी-सी मदद भी उनके लिए राहत और हौसले का कारण बन सकती है। साजिद ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सभी लोगों को मिल-जुलकर काम करना चाहिए। वह हर धर्म के लोगों के बीच एकता प्रेम और भाईचारे को मजबूत बनाने के साथ देश के विकास में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए इस तरह के सामाजिक कार्य आगे भी जारी रखने की इच्छा जताई।

सेवा से सद्भाव तक, यही असली पहचान

ब्लोम्स इंटरनेशनल इंडिया की इस पहल ने समाज को संदेश दिया कि इंसान की पहचान उसके धर्म से नहीं, बल्कि उसके कर्म और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता से होती है। जरूरतमंदों के चेहरों पर राहत लाने का यह प्रयास सामाजिक एकता और सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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