फर्जी हेल्थ कैंप से आधार की चोरी, फिर साइबर ठगी का खेल! दिल्ली पुलिस ने मथुरा से दबोचे दो आरोपी

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नई दिल्ली: साइबर ठगों ने अब लोगों की पहचान चुराने के लिए भी नया रास्ता निकाल लिया। कहीं सस्ते इलाज का लालच, तो कहीं रियायती दवाओं के नाम पर आधार और बायोमेट्रिक विवरण हासिल कर कथित तौर पर अवैध सिम सक्रिय करने का खेल! दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) इकाई ने ऐसे ही संदिग्ध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मथुरा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी पिछले एक साल में तीन हजार से अधिक सिम सक्रिय करने के संदेह के दायरे में हैं। इनसे जुड़े 20 से अधिक साइबर अपराध शिकायतों के तार मिले हैं, जिनमें करीब 2.64 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का संबंध बताया गया है।

डिजिटल अरेस्ट से खुला राज

मामले की शुरुआत डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी की जांच से हुई। शिकायतकर्ता श्रीनिवास को कथित तौर पर व्हाट्सऐप के जरिए कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर करीब दो सप्ताह तक मानसिक दबाव में रखा गया। इसके बाद छह अलग-अलग बैंक खातों में छह आरटीजीएस लेनदेन के जरिए कुल 1.64 करोड़ रुपये स्थानांतरित करा लिए गए। मामले में एक सितंबर 2026 को विशेष सेल/आईएफएसओ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

गांवों में कैंप, ऑनलाइन सिम का कारोबार

जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर गांवों में फर्जी स्वास्थ्य शिविर लगाकर रियायती दवाएं देने का लालच देते थे। इसी बहाने ग्रामीणों के आधार और बायोमेट्रिक विवरण जुटाकर सिम हासिल करने में उनके दुरुपयोग का आरोप है। पुलिस के मुताबिक आरोपी प्रतिदिन 20 से 30 ई-सिम का कारोबार करते थे। करीब 800 से 1,200 रुपये में सिम खरीदकर लगभग 2,000 रुपये तक में बेचने की बात भी सामने आई है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम के जरिए ई-सिम तथा क्यूआर कोड की आपूर्ति किए जाने की जांच चल रही है। भुगतान में अमेरिकी डॉलर से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी के इस्तेमाल और विदेशी संपर्कों के संभावित संबंध भी खंगाले जा रहे हैं।

तीन मोबाइल बरामद, नेटवर्क की तलाश जारी

पुलिस ने 20-21 अक्टूबर की दरमियानी रात मथुरा के गांव कोटा में छापा मारकर जितेंद्र सिंह (29) और ब्रजेश कुमार (21) को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, वे पहचान से बचने के लिए पुराने फोन नष्ट कर नए फोन इस्तेमाल करते थे।

डीसीपी गौरव त्यागी के नेतृत्व में आगे की जांच जारी है। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि आधार ओटीपी और सिम सक्रियण कोड किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें। साइबर वित्तीय ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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