नई दिल्ली: अमेरिका की बेहद सख्त होती इमिग्रेशन और निर्वासन नीतियों के बीच एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने शनिवार (29 अगस्त) को एक विशेष निर्वासन उड़ान के जरिए कई देशों के शरणार्थियों को मध्य अफ़्रीकी गणराज्य (सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य) भेज दिया। इस उड़ान में एक 20 वर्षीय अफगान नागरिक भी शामिल है, जिसके परिवार ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की सीधी सहायता की थी। अमेरिका के इस कड़े कदम से मानवाधिकार संगठनों में भारी चिंता व्याप्त है। इससे पहले भेजी गई पहली फ्लाइट में एक ऐसी राजनीतिक उत्पीड़न की शिकार ईरानी महिला भी शामिल थी, जिसे सुरक्षा दिए जाने की सख्त जरूरत थी।
कई देशों के प्रवासियों को तीसरे देश भेजने की नीति
‘ह्यूमन राइट्स फर्स्ट’ की निदेशक सावी अरवे ने जानकारी दी कि इस विशेष उड़ान में कुल 20 शरणार्थी सवार थे, जिनमें 12 अफगान और 8 ईरानी नागरिकों के अलावा नेपाल और निकारागुआ के प्रवासी भी शामिल थे।
मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि अमेरिकी प्रशासन ने लगभग दो दर्जन देशों के साथ ऐसे गुप्त समझौते कर रखे हैं, जिनके तहत शरणार्थियों को उन देशों में धकेला जा रहा है जिनसे उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं रहा है।
अमेरिकी इमिग्रेशन नीति का कड़ा रूप
प्रवासी युवक की वकील अल्मा डेविड के मुताबिक, अमेरिकी अदालत के एक जज ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि युवक को अफ़ग़ानिस्तान नहीं भेजा जा सकता, क्योंकि तालिबान से उसकी जान को सीधा खतरा था। अदालती दस्तावेजों के अनुसार, तालिबान शासन इस परिवार को केवल इसलिए निशाना बना रहा था क्योंकि इसके सदस्यों ने अमेरिकी सेना के साथ काम किया था।
युवक का एक भाई पूर्व में अफगान नेशनल आर्मी का हिस्सा रहा, जो 2021 तक अमेरिकी बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ती रही। वहीं उसका दूसरा भाई, जो अमेरिकी-प्रशिक्षित पायलट था, उसे तालिबान ने पहले ही मौत के घाट उतार दिया था। इस पूरी पृष्ठभूमि और अदालती रोक के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने उसे किसी तीसरे देश डिपोर्ट कर दिया।
कानूनी चोर-रास्तों का इस्तेमाल
इमिग्रेशन मामलों के वकीलों का कहना है कि प्रशासन कानून की बारीकियों और कमियों का सहारा लेकर निर्वासन की कार्यवाही पूरी कर रहा है। प्रवासियों को सीधे उनके मूल देश न भेजकर किसी अनजान तीसरे देश में छोड़ देने से इस बात का खतरा काफी बढ़ जाता है कि वे अंततः उन्हीं मुल्कों में वापस पहुंच जाएंगे जहां से वे अपनी जान बचाकर भागे थे। जून के बाद मध्य अफ्रीकी गणराज्य के लिए अमेरिका की यह दूसरी निर्वासन उड़ान थी। इससे पहले भेजी गई पहली फ्लाइट में एक ऐसी राजनीतिक उत्पीड़न की शिकार ईरानी महिला भी शामिल थी, जिसे सुरक्षा दिए जाने की सख्त जरूरत थी।












