नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के सबसे अहम स्वदेशी प्रोजेक्ट तेजस Mk-1A के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से इंजन की कमी से जूझ रहे इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी बाधा अब दूर होती दिख रही है। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि अमेरिकी कंपनी GE एयरोस्पेस साल के अंत तक भारत को 12 और F404 इंजन सप्लाई करेगी।
GE ने हर महीने 4 इंजन देने का किया वादा
दरअसल, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने 27 तेजस Mk-1A के एयरफ्रेम पहले ही तैयार कर लिए हैं, लेकिन इंजन न मिलने से डिलीवरी अटकी हुई थी। अब तक सिर्फ 10 इंजन ही मिल पाए थे, बाकी विमानों को टेस्टिंग के लिए रिजर्व इंजन से उड़ाया जा रहा था। GE ने अब हर महीने 4 इंजन देने का वादा किया है। इससे 2026 के अंत तक कम से कम एक पूरी स्क्वाड्रन को वायुसेना में शामिल करने का लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।
HAL के सीएमडी ने पहले ही बताया था कि एयरफ्रेम तैयार हैं, लेकिन रडार और हथियार प्रणाली के इंटीग्रेशन की तकनीकी जांच बाकी है। नए इंजन आने के साथ ही फाइनल टेस्टिंग और वैलिडेशन का काम तेज हो जाएगा।
180 विमानों का मेगा प्लान
वायुसेना ने कुल 180 तेजस Mk-1A का ऑर्डर दिया है। पहला सौदा 2021 में 83 विमानों का हुआ था और दूसरा बड़ा सौदा सितंबर 2025 में 97 विमानों का किया गया, जिसमें 68 फाइटर और 29 ट्रेनर शामिल हैं। इस डील की कीमत 62,370 करोड़ रुपये से ज्यादा है। दूसरे ऑर्डर की खास बात है कि इसमें स्वदेशी तकनीक 64% से ज्यादा होगी। इसमें पहली बार स्वदेशी उत्तम AESA रडार, आत्मरक्षा प्रणाली और कंट्रोल एक्चुएटर्स जैसे 67 नए देसी उपकरण लगाए जाएंगे। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।
लंबी अवधि के लिए HAL ने नवंबर 2025 में GE के साथ 113 और इंजनों की अलग डील भी की है, जिनकी सप्लाई 2027 से 2032 के बीच होगी। HAL अपने प्रोडक्शन को बढ़ाकर सालाना 24 विमान बनाने की तैयारी में है। यदि इंजन की सप्लाई इसी रफ्तार से जारी रही और तकनीकी अड़चनें जल्द दूर हुईं, तो तेजस Mk-1A जल्द ही वायुसेना की ताकत बनकर आसमान में उड़ान भरेगा।












