श्रीकृष्ण गौशाला में भागवत कथा के छठे दिन गूंजी बाल लीलाओं की महिमा, गौ सेवा और संत दर्शन का बताया महत्व

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रतिया: रिम्पी जिन्दल स्थानीय श्रीकृष्ण गौशाला के प्रांगण में संत बाबा बाबू राम जी दुगाल वाले व संत बाबा कर्म चंद जी बच्चुआना वालों की असीम कृपा एवं संत शिरोमणि श्री नारायण मुनि जी के पावन सानिध्य में श्रीकृष्ण गौशाला कमेटी द्वारा पितृ पक्ष के उपलक्ष्य में गौ सेवा हेतु आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। व्यास पीठ पर विराजमान प्रसिद्ध भागवत भास्कर आचार्य श्री राम सेवक शास्त्री जी कालवाणु वाले ने छठे दिन की कथा का शुभारंभ करते हुए भोजन और भजन के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में भोजन का बहुत बड़ा महत्व है। जैसा खाए अन्न वैसा होवे मन। यदि हमारा अन्न शुद्ध और सात्विक होगा तो हमारा मन भी शुद्ध होगा और शुद्ध मन से किया गया भजन ही प्रभु के चरणों तक पहुंचता है। मनुष्य को हमेशा मेहनत और ईमानदारी की कमाई का ही भोजन ग्रहण करना चाहिए।

संतों के दर्शन से श्रद्धालु निहाल 

आज की कथा में संत शिरोमणि श्री नारायण मुनि जी महाराज दुगाल वाले व संत शिरोमणि श्री बछुआने वाले महाराज जी ने उपस्थित श्रदालुओं को अपने दर्शनों से निहाल किया संत दर्शन के महत्व का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने कहा कि संतों का दर्शन बड़े भाग्य से मिलता है। एक बार संत दर्शन करने से करोड़ों तीर्थों के दर्शन के बराबर पुण्य मिलता है। संत ही हमें ईश्वर से मिलने का सच्चा मार्ग दिखाते हैं। संतों की संगति से मनुष्य के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

गौमाता सेवा का महत्व 

गौमाता की सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गौ सेवा से बढ़कर इस कलयुग में कोई सेवा नहीं है। गौ माता में 33 कोटी देवी-देवताओं का वास होता है। जिस घर में गौ माता की सेवा होती है, वहां कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती। पितृ पक्ष में गौ सेवा करने से हमारे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सजीव चित्रण 

इसके पश्चात आचार्य जी ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं माखन चोरी लीला, ऊखल बंधन, गोवर्धन लीला और कालिया नाग दमन लीला का बड़ा ही मार्मिक और सजीव चित्रण किया। बृजवासियों की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि बृज के लोगों जैसा निश्चल प्रेम पूरे संसार में कहीं नहीं है। बृजवासी अपना सब कुछ छोड़कर केवल कृष्ण से प्रेम करते हैं और भगवान भी अपने भक्तों के प्रेम के भूखे हैं। कथा के बीच बीच में माखन मिश्री खावे लाला और वृंदावन की महिमा न्यारी  जैसे ही भजनों पर श्रद्धालु झूम झूम कर नाचने लगे और पूरा पंडाल राधे राधे के जयकारों से गूंज उठा।

भागवत गीता का निःशुल्क वितरण  

इस पावन अवसर पर प्रमुख समाजसेवी प्रवीण गर्ग की माता जी द्वारा अपनी ओर से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को धर्म लाभ हेतु श्रीमद् भागवत गीता की पुस्तकों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस पुनीत कार्य की सभी ने सराहना की। इस मौके पर गौशाला प्रधान सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्य, शहर की विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि व बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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