CJP प्रदर्शन पर UN को भारत का करारा जवाब, पूछा- आखिर किस देश में युवा सरकार से सवाल करते हैं?

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नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) विरोध-प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ की रिपोर्ट पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। भारत ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज करते हुए सवाल उठाया कि अगर देश में युवाओं को बोलने की आजादी नहीं है, तो वे राजधानी तक मार्च कैसे कर रहे हैं और बड़े नेताओं से संवाद कैसे कर रहे हैं।

भारतीय राजनयिक ने सख्त लहजे में कहा, ‘किस दमनकारी देश में युवाओं का कोई व्यंग्यात्मक समूह सरकार से सवाल पूछ सकता है, राजधानी तक मार्च कर सकता है और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकर बातचीत कर सकता है?’

संविधान आजादी देता है, UN सत्र में भारत का पक्ष

यह जवाब संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में दिया गया, जहां ‘शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता’ पर विशेष प्रतिवेदक के साथ चर्चा हो रही थी। भारत की ओर से प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने, संगठन बनाने और बोलने की आजादी देता है। भारत में इन अधिकारों की रक्षा के लिए स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जैसी मजबूत संस्थाएं काम कर रही हैं।

UN रिपोर्ट के दावों पर उठाए सवाल

अनुज स्वरूप ने विशेष प्रतिवेदक जीना रोमेरो की रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई होती है। इस पर स्वरूप ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठा दिया। उन्होंने मानवाधिकार परिषद में मानवाधिकार उच्चायुक्त की उस टिप्पणी का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों से निपटने के लिए बातचीत ज्यादा असरदार तरीका है। स्वरूप ने तंज कसते हुए कहा, ‘शायद यह बात विशेष प्रतिवेदक के ध्यान से छूट गई।’

यंग लीडर्स समिट का दिया उदाहरण

भारतीय राजनयिक ने बताया कि जब छात्रों ने सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन किया, तो सरकार ने दमन के बजाय सीधे युवाओं से बात की। दोषियों पर कार्रवाई हुई और प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में बड़े सुधार किए गए। उन्होंने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स समिट’ का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पहल के तहत 50 लाख युवाओं ने सीधे प्रधानमंत्री के साथ राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। यह इस बात का सबूत है कि भारत में युवाओं की आवाज को दबाया नहीं, बल्कि सुना जाता है।

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