अर्णब के बाद मुरासु का विकराल रूप, दक्षिण भारत में तबाही का खतरा; उत्तर भारत में बढ़ेगी ठंड

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बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ मुरासु चक्रवात अब आंध्र प्रदेश के समुद्री तट की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मौसम की इस हलचल ने दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका पैदा कर दी है। समुद्र की ऊपरी सतह का तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने के बाद तूफानी गतिविधियों को ऊर्जा मिली है। बीते सात दिनों के भीतर यह दूसरा बड़ा चक्रवाती सिस्टम है, जिसने मौसम विभाग की चिंता बढ़ाई है।

अनुमान है कि सोमवार देर रात ढाई बजे से मंगलवार सुबह चार बजे के बीच यह आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्र से टकरा सकता है। उस समय हवा की रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसका असर केवल समुद्र किनारे तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि तूफान कमजोर होने के बाद भी कई इलाकों में बादल और बारिश का दौर जारी रह सकता है।

आंध्र प्रदेश में सबसे ज्यादा असर की आशंका

मुरासु के पहुंचने से आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में मौसम बेहद खराब रहने का अनुमान है। राज्य के समुद्र किनारे बसे क्षेत्रों के साथ रायलसीमा में भी भारी से अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है। तेज झोंकों के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। तमिलनाडु के उत्तरी हिस्सों में भी तूफानी गतिविधियों का असर महसूस किया जा सकता है। यहां बारिश के साथ हवा की गति बढ़ने का अनुमान है। तेलंगाना के कई इलाकों में भी तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की संभावना जताई गई है। इन राज्यों में हवा की रफ्तार 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी बरसेंगे बादल

मुरासु का प्रभाव पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी पहुंच सकता है। तीन नवंबर से ओडिशा और छत्तीसगढ़ में लगातार दो दिनों तक भारी बारिश की आशंका है। मौसम में बदलाव के कारण इन राज्यों के कई क्षेत्रों में बादलों का जमावड़ा रह सकता है। कर्नाटक और केरल के कुछ इलाकों में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। इस तरह दक्षिण और पूर्वी भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

मध्य भारत तक पहुंच सकता है चक्रवाती सिस्टम

मुरासु का असर आंध्र प्रदेश तक सीमित रहने के बजाय मध्य भारत के कुछ हिस्सों में भी दिखाई दे सकता है। मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों में वर्षा की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में भी बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। हालांकि उत्तरी भारत में इस तूफान के सीधे पहुंचने की संभावना नहीं जताई गई है। इसके बावजूद मौसम में अप्रत्यक्ष बदलाव महसूस हो सकता है।

दिल्ली, पंजाब और राजस्थान में कैसा रहेगा मौसम?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में फिलहाल बारिश की संभावना कम है। इन राज्यों में मौसम सामान्यतः सूखा बना रह सकता है। दिन के समय धूप तेज रहने का अनुमान है, जबकि सुबह और रात के वक्त तापमान में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। इससे सर्द मौसम की शुरुआत का एहसास बढ़ेगा। मुरासु की तुलना में अर्णब तूफान के दौरान हवाओं की गति अधिक बताई गई थी, लेकिन मौजूदा सिस्टम का प्रभाव भौगोलिक रूप से बड़े क्षेत्र तक फैल सकता है।

पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी के संकेत

जम्मू-कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण कुछ स्थानों पर वर्षा और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ गिरने की संभावना है। इसके उलट हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के ज्यादातर क्षेत्रों में भी बारिश की गतिविधियां सीमित रहेंगी। दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने से सुबह-शाम ठंड महसूस हो सकती है। आने वाले दिनों में मुरासु का कमजोर पड़ना तय मौसम बदलाव को तुरंत समाप्त नहीं करेगा, इसलिए दक्षिण और मध्य भारत के मौसम पर लगातार नजर बनी रहेगी।

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