ट्विशा शर्मा केस में CBI ने दाखिल की पहली चार्जशीट, पुलिस की जांच पर उठे गंभीर सवाल

0
9
Twisha Sharma Death Case
Gemini

नई दिल्ली: पूर्व मिस पुणे और मॉडल-एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है. जांच एजेंसी ने ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास गिरिबाला सिंह को मामले में आरोपी बनाया है. दोनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. CBI की चार्जशीट में दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85, 108 और 3(5) के तहत आरोप लगाए गए हैं. इनमें आत्महत्या के लिए उकसाने और दहेज प्रताड़ना से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. इसके अलावा दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.

ट्विशा शर्मा की शादी नवंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी. समर्थ की मां गिरिबाला सिंह मध्य प्रदेश में जिला जज के पद से रिटायर हुई थीं. शादी के लगभग छह महीने बाद 12 मई 2026 को ट्विशा अपने भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध हालत में बेहोश मिली थीं. परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. शुरुआती पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह फांसी बताई गई थी. इसके बाद ट्विशा के मायके वालों ने मौत की परिस्थितियों और दहेज प्रताड़ना को लेकर सवाल उठाए.

परिवार ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा और परिवार ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही उन्हें दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जा रहा था. परिवार ने यह भी दावा किया कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम में शरीर पर मौजूद चोटों को नजरअंदाज किया गया और प्रभावशाली परिवार होने के कारण पुलिस ने ठीक से जांच नहीं की. वहीं, गिरिबाला सिंह ने आरोपों से इनकार किया था. उन्होंने दावा किया था कि ट्विशा सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी और ड्रग्स की लत से परेशान थीं. ट्विशा के परिवार ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था.

CBI जांच में सामने आई पुलिस की लापरवाही

FIR दर्ज करने में देरी, पुलिस की जांच और आरोपी पति के फरार रहने को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामला CBI को सौंप दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लिया था. इसके बाद AIIMS के डॉक्टरों के पैनल ने ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया. CBI की जांच में पुलिस की कार्रवाई में कई खामियां सामने आईं. जांच के दौरान पता चला कि जिस बेल्ट से फांसी लगाए जाने की बात कही गई थी, उसे पोस्टमॉर्टम के समय जांच के लिए नहीं भेजा गया था. उसकी जब्ती से जुड़े दस्तावेजों पर गवाहों के हस्ताक्षर भी नहीं थे. इस लापरवाही पर एक पुलिस अधिकारी पर जुर्माना लगाया गया था.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here