मां के हाथ का खाना 5 साल तक रखा संभालकर, खाते ही छलके बाप-बेटी के आंसू

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Japanese Woman Viral Story
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नई दिल्ली: अपनों के चले जाने के बाद उनकी यादें ही इंसान के जीने का सहारा बन जाती हैं। कभी-कभी लोग अपने बिछड़े परिजनों की मौजूदगी को महसूस करने के लिए ऐसे असाधारण कदम उठा लेते हैं, जो आम सोच से परे होते हैं। जापान की मिजुकी तकाराया और उनके पिता की कहानी भी कुछ ऐसी ही भावुक करने वाली है। मां के अचानक दुनिया से रुखसत हो जाने के बाद, उनके हाथों से बनी आखिरी डिश को इस परिवार ने पूरे पांच साल तक फ्रीजर में सहेज कर रखा। एक प्रसिद्ध टीवी शो के माध्यम से जब विशेषज्ञों और शेफ्स ने उस भोजन को दोबारा खाने योग्य बनाया, तो वह पल केवल स्वाद का नहीं, बल्कि मां के अहसास का जीवंत पुनर्जन्म बन गया।

अचानक हुए हादसे ने छोड़ा कभी न भरने वाला जख्म

यह कहानी उस दिन से शुरू होती है जब मिजुकी की मां ने बड़े चाव से पूरे परिवार के लिए ‘बुता नो काकुनी’ डिश तैयार की थी। खाना बनकर तैयार ही हुआ था कि कुछ ही घंटों के भीतर ब्रेन हैमरेज के कारण उनकी अचानक मृत्यु हो गई। 
मां के हाथों से बने उस अंतिम भोजन को खाने की हिम्मत न तो बेटी जुटा सकी और न ही पिता का दिल उसे फेंकने के लिए राजी हुआ। उन्होंने उस बर्तन को फ्रीजर के एक कोने में सुरक्षित रख दिया। 

शेफ्स ने पकाया 5 साल पुराना खाना

जब भी फ्रीजर खुलता, वह खाना मां की न दिखने वाली मौजूदगी का अहसास कराता रहता। वक्त बीतता गया, लेकिन पांच साल बाद भी पिता-पुत्री उस आखिरी निशानी को खोना नहीं चाहते थे। आखिर में मिजुकी ने जापान के लोकप्रिय टीवी शो ‘तांतेई नाइट स्कूप’ से संपर्क साधकर मदद मांगी। शो के मेकर्स ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और पेशेवर शेफ को इस काम में लगाया। लैब जांच के दौरान भोजन में कुछ बैक्टीरिया पाए गए, लेकिन विशेषज्ञों ने हार नहीं मानी। उन्होंने हाई-हीट प्रेशर कुकिंग तकनीक का सहारा लेकर उस पांच साल पुराने खाने को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से दोबारा तैयार कर दिया।  शेफ्स ने उस भोजन को दोबारा खाने योग्य बनाया, तो वह पल केवल स्वाद का नहीं, बल्कि मां के अहसास का जीवंत पुनर्जन्म बन गया।

एक निवाले के साथ जिंदा हो उठीं भूली-बिसरी यादें

जब प्रेशर कुकर से तैयार होकर मां के हाथों की वह डिश मेज पर परोसी गई, तो पिता और बेटी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। जैसे ही दोनों ने पहला निवाला मुंह में रखा, बरसों पुरानी यादें एक झटके में ताजा हो गईं। रसोई में मां की चहल-पहल, उनकी मीठी डांट और परिवार का साथ बैठकर हंसना-बोलना, सब कुछ आंखों के सामने तैरने लगा। पिता-बेटी ने रोते हुए स्वीकार किया कि इसका स्वाद हूबहू मां के बनाए खाने जैसा ही है। उस निवाले में सिर्फ मसालों की खुशबू नहीं थी, बल्कि मां का अनमोल प्यार और ममता घुली हुई थी। उन्होंने हाई-हीट प्रेशर कुकिंग तकनीक का सहारा लेकर उस पांच साल पुराने खाने को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से दोबारा तैयार कर दिया।

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