नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के लिए सोमवार का दिन दोहरा झटका लेकर आया। पार्टी के दो बड़े नेताओं आशुतोष रांका और सौरभ दास की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी गई और उसी के बाद उनका मामला दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया। सीजेपी का आरोप है कि जमानत में जानबूझकर देरी की जा रही है। इसके साथ ही रांका और दास की हिरासत अब दो दिन के लिए बढ़ा दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पकड़ा गया था और तब उन्हें पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाकर तीन नए स्थल शामिल किए गए थे। आदेश के बाद रांका और दास जंतर-मंतर की दीवार फांदकर पहुंचे, तिरंगा फहराया और नारेबाजी की। उनके साथ पार्टी नेता अजिंक्य शिंदे को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन शांति बनाए रखने की शर्त और 5 हजार रुपये के मुचलके पर उन्हें रिहा कर दिया गया।
अब तक का घटनाक्रम
सीजेपी ने 10 अक्टूबर को एसआईआर यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ प्रदर्शन का ऐलान किया था। उस दिन दिल्ली में लैंडिंग के बाद सौरभ दास, आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके को हिरासत में ले लिया गया। बाद में दास और रांका को जंतर-मंतर मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद पार्टी ने कनॉट प्लेस पर तिरंगा फहराने का ऐलान किया। 17 अक्टूबर को दीपके भी हिरासत में लिए गए, लेकिन बाद में रिहा कर दिए गए।
क्राइम ब्रांच के पास गया केस
पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि हिरासत बढ़ाए जाने के तुरंत बाद दिल्ली पुलिस ने दास और रांका का मामला क्राइम ब्रांच को भेज दिया। कनॉट प्लेस थाने में बीएनएस की धारा 223ए (लोक सेवक के आदेश की अवहेलना), 332 (अपराध के लिए अनधिकृत प्रवेश) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। संसद मार्ग थाने में धारा 221 (लोक सेवक के काम में बाधा), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 132 (लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 121(1) (लोक सेवक को रोकने के लिए चोट पहुंचाना) और 3(5) (समान मंशा) के तहत दूसरी एफआईआर दर्ज हुई थी।
सीजेपी ने फिलहाल अगले प्रदर्शन का ऐलान नहीं किया है। रविवार को दीपके ने कहा था कि रांका और दास के बाहर आने के बाद वे दोबारा मिलकर रणनीति बनाएंगे और देखेंगे कि आंदोलन को आगे कैसे ले जाया जाए। उनका कहना था कि बीते दिनों लोगों को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया और इससे घबराहट पैदा करने की कोशिश हो रही है।
कानूनी सलाह और सीजेपी के आरोप
दीपके ने बताया था कि वे कानूनी सलाह के लिए वकील से मिलने जा रहे हैं। सीजेपी ने शनिवार को बताया कि पार्टी ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली है। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि रविवार तक दोनों नेता रिहा नहीं हुए, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगी। सीजेपी का आरोप है कि दोनों सह-संयोजकों की रिहाई रोकने के लिए जमानत की सुनवाई में जानबूझकर देरी की जा रही है। दीपके का दावा है कि गिरफ्तारी जारी रखने के लिए सुनवाई में बाधा डाली जा रही है।
पार्टी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत की कार्यवाही को “सर्कस” बताया। उनका दावा है कि दोनों नेताओं को हिरासत में रखने के लिए कानून का दुरुपयोग हो रहा है। रत्ना सिंह ने कहा कि SEM अदालत को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि उसकी निष्पक्षता से समझौता हो चुका है।












