नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका में ही विरोध तेज हो गया है. देश के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का रुख किया है. राज्यों का आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद नए टैरिफ के जरिए कारोबारियों और आम लोगों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाल रही है.
नए टैरिफ को लेकर क्यों हुआ विवाद?
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में यूरोपीय संघ समेत कई देशों से आने वाले सामान पर दोहरे अंकों में टैरिफ लगाया है. सरकार का तर्क है कि इन देशों से आने वाले सामान में बंधुआ मजदूरी से जुड़े उत्पादों को रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हैं.
हालांकि, राज्यों का कहना है कि नए टैरिफ को लागू करने का तरीका कानूनी तौर पर सवालों के घेरे में है. इस मामले की अगुवाई न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स कर रही हैं. उनका आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में झटका लगने के बाद प्रशासन ने दूसरे कानून का सहारा लेकर फिर से टैक्स लगाने की कोशिश की है.
सुप्रीम कोर्ट से पहले भी लगा था झटका
ट्रंप सरकार ने पहले 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस साल फरवरी में कहा कि इस कानून के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. इसके बाद सरकार ने अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था, जिसकी समय-सीमा 24 जुलाई की आधी रात को समाप्त हो गई.
Section 301 बना नया आधार
अस्थायी टैरिफ की अवधि खत्म होने के बाद प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की Section 301 का इस्तेमाल करते हुए 10 से 12.5 प्रतिशत तक नया टैरिफ लगाया. सरकार इसे अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ जरूरी कदम बता रही है.
वहीं, व्हाइट हाउस ने नए टैरिफ का बचाव करते हुए इसे कानूनी और अमेरिकी श्रमिकों के हित में बताया है. अब 25 राज्यों की याचिका के बाद इस नीति पर अदालत का फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.












