हूतियों से अमेरिका की गुप्त बातचीत ने बदला पूरा खेल, लाल सागर संकट के बीच सऊदी अरब की बढ़ी मुश्किलें

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America Houthi Talks
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नई दिल्ली: यमन के लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों की हालिया बढ़त और अमेरिका के साथ उनकी सीधी बातचीत की खबरों ने मध्य पूर्व की भू-राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और हूतियों के बीच हुई इस बैठक के बाद सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताएं गहरा गई हैं। लाल सागर में रणनीतिक मोर्चे पर अकेले पड़ते दिख रहे रियाद को अब अपने सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से अपेक्षित सैन्य समर्थन नहीं मिल रहा है। 

अमेरिका को मिला आश्वासन 

पूर्व अमेरिकी राजनयिकों का मानना है कि इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक समझ बन रही है। अमेरिका, जो इस क्षेत्र में लंबे समय से सैन्य अभियान चला रहा है। 
अब सीधे संघर्ष से बचते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है। इस अनौपचारिक तालमेल से वाशिंगटन को तो राहत मिल सकती है, लेकिन सऊदी अरब के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। 

मस्कट में गुपचुप मुलाकात

ओमान की राजधानी मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई इस गोपनीय बैठक में हूती प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजीरी जैसे शीर्ष नेताओं ने किया। रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने अमेरिकी अधिकारियों को स्पष्ट भरोसा दिया है कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे और 2025 में हुए सीजफायर का पूरी तरह पालन करेंगे। 
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी हूतियों के साथ सीधे संपर्क में होने की पुष्टि की है। हालाँकि, हूतियों ने सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले टैंकरों को निशाना बनाने की अपनी नीति जारी रखने की बात कही है। 

लाल सागर में हूतियों का बढ़ता दबदबा 

यह कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में सामने आई है जब हूतियों ने यमन के लाल सागर तटीय इलाके में तेजी से प्रगति करते हुए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित कई महत्वपूर्ण द्वीपों और बंदरगाहों पर अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार और विशेष रूप से सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए जीवन रेखा माना जाता है। इसी दौरान सऊदी सीमा के भीतर तेल ठिकानों और प्रमुख शहरों पर लगातार हूती ड्रोन व मिसाइल हमलों ने स्थिति को और नाजुक बना दिया है, यहाँ तक कि मक्का के पास भी सुरक्षा अलर्ट जारी करना पड़ा।

अकेला पड़ता सऊदी अरब

सऊदी समर्थित यमनी बल हूतियों की इस आक्रामक बढ़त को रोकने में नाकाम रहे हैं। पाकिस्तान और तुर्की जैसे क्षेत्रीय देशों ने यमन में सीधे सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है, वहीं अमेरिका और ब्रिटेन ने भी व्यापक हवाई हमलों की सऊदी मांग को स्वीकार नहीं किया है। रियाद को अपनी सुरक्षा के लिए अन्य रणनीतिक विकल्पों की तलाश करनी पड़ रही है। यदि वाशिंगटन और हूतियों के बीच यह अनौपचारिक समझ कायम रहती है, तो सऊदी अरब को लाल सागर में अपनी जहाजरानी और तेल आपूर्ति की सुरक्षा का भारी दबाव अकेले ही संभालना होगा।

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