नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटाने की कतर की कोशिश एक बार फिर बेनतीजा रही। इस हफ्ते हुई बड़ी बैठकों के बाद भी दोनों देश समझौते के करीब नहीं पहुंचे। तीन सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हैं और कोई झुकने को तैयार नहीं। सोमवार को कतर के मुख्य मध्यस्थ अली अल-थवादी ने न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से कई घंटे बात की। चर्चा कतर के दो पन्नों के प्रस्ताव पर हुई। ईरान चाहता था कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी पूरी तरह हटे, जबकि अमेरिका की मांग थी कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम सीमित करे।
उसी शाम अल-थवादी वॉशिंगटन पहुंचे और ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर से मिले। बैठक के कुछ हिस्से में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल थे, पर व्हाइट हाउस ने कुछ नहीं कहा।
सुबह उम्मीद, शाम को झटका
सोमवार सुबह व्हाइट हाउस उत्साहित था। अधिकारियों ने कहा कि बातचीत सही दिशा में है और ईरान परमाणु मुद्दे पर नरमी दिखा सकता है। यह भी बताया गया कि ठोस कदम उठाने पर ट्रंप प्रतिबंधों में राहत और रोके गए फंड जारी करने को तैयार हैं, लेकिन कुछ घंटे बाद ट्रंप ने ‘ट्रूथ सोशल’ पर लिख दिया कि उन्होंने ईरान को कोई प्रस्ताव दिया ही नहीं। इसके बाद माहौल बदल गया।
दोनों की अपनी-अपनी दलील
एक सूत्र के मुताबिक वार्ता पूरी तरह अटक गई है। ईरान ऐसी मांगें रख रहा है जो अमेरिका नहीं मान सकता, और अमेरिका खुद को बढ़त में मानकर समझौते की जरूरत नहीं समझ रहा। पाकिस्तान और मिस्र ने भी ईरान पर परमाणु मामले में ढील देने का दबाव डाला। ईरान ने कहा कि वह तभी सोचेगा, जब अमेरिका पिछले साल जून के समझौते पर लौटे। ईरानी अधिकारी मोहसिन रजाई ने कहा कि ट्रंप फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं। जवाब में ट्रंप ने कहा कि ईरान आखिर झुकेगा, क्योंकि उसे परमाणु हथियार नहीं मिलेगा।
कतर ने कोशिश छोड़ी नहीं है, लेकिन उसके मध्यस्थ निराश होने लगे हैं। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि मिड-टर्म चुनाव के बाद ट्रंप बड़े सैन्य अभियान फिर शुरू कर सकते हैं।












