नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई। प्रदर्शनकारियों के जुटने की आहट के साथ ही दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा का ऐसा पहरा नजर आया मानो पूरा सुरक्षा तंत्र किसी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए मोर्चे पर उतर आया हो। धौला कुआं से जंतर-मंतर तक जनपथ से मिंटो पुल और दिल्ली-गाजियाबाद सीमा तक पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। अलग-अलग स्थानों से अब तक करीब 400 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना सामने आई है। वहीं कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ने तथा अवरोधक तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश किए जाने की खबरें भी मिली हैं।
प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना भी सामने आई है ऐसे में राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है और पुलिस हालात पर लगातार नजर रख रही है।
धौला कुआं से जंतर-मंतर तक हिरासतों का दौर
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस की कार्रवाई चर्चा में आ गई। धौला कुआं सहित राजधानी के विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचनाएं सामने आईं। इनमें चर्चित सामग्री निर्माता, छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल बताए गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम से दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। वहीं, सीजेपी के कानूनी प्रकोष्ठ की प्रमुख रत्ना सिंह को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। इसके अलावा अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को विमान से पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। इस कार्रवाई को लेकर सीजेपी की ओर से आपत्ति जताए जाने और संबंधित लोगों की रिहाई की मांग किए जाने की खबरें भी सामने आईं।
मिंटो पुल पर अवरोधकों के सामने आमने-सामने हालात
राजधानी के मिंटो पुल क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान तनाव बढ़ने की खबर सामने आई। बताया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधकों की पहली परत पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया। इसके बाद मौके पर तैनात पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला। इस दौरान कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना है।
जंतर-मंतर और जनपथ सहित अन्य संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस की सक्रियता बढ़ी रही। छात्र संगठनों से जुड़े विद्यार्थियों और प्रदर्शन में भाग लेने जा रहे अन्य लोगों को भी हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं।
सीमा पर वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाली कमान
प्रदर्शन की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था जोन-एक देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने सीमा क्षेत्र का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान संयुक्त पुलिस आयुक्त मिलिंद महादेव डुंबरे और पूर्वी जिले के पुलिस उपायुक्त राजीव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सीमा पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की टीमें तैनात रहीं। वाहनों और लोगों की जांच की गई तथा संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहने पर जोर दिया।
गाजियाबाद में भी पुलिस की कार्रवाई
दिल्ली से सटे गाजियाबाद में भी प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई तेज होने की सूचना सामने आई। विभिन्न खबरों के अनुसार गाजियाबाद पुलिस ने 90 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इनमें कुछ किसान नेताओं के साथ राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी निगरानी और जांच के कारण राजधानी की ओर आने वाले लोगों की आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका बनी रही। पुलिस की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ अनियंत्रित न हो और संवेदनशील मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने से बचाया जा सके।
करीब 400 हिरासत में
राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से मिली सूचनाओं के अनुसार अब तक करीब 400 लोगों को हिरासत में लिया गया है। कुछ स्थानों पर उग्र प्रदर्शन पुलिस के साथ तनातनी और पुलिसकर्मियों के घायल होने की खबरें भी सामने आई हैं। माकपा नेता और पूर्व सांसद बृंदा करात और केरल सरकार की पूर्व मंत्री केके शैलजा समेत अन्य वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर के लिए रवाना होने से पहले हिरासत में लेकर बस में बैठा दिया गया।
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, सांसद जॉन ब्रिटास और केरल के पूर्व वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने जंतर-मंतर पर लगाए गए बैरिकेड्स तक मार्च किया। उन्होंने कहा कि वे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 163 का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं।
क्योंकि वे केवल तीन लोग हैं। इसके बाद उन्हें एक जीप में हिरासत में ले लिया गया। शनिवार सुबह सुबह जंतर-मंतर इलाके से 70 और लोगों को हिरासत में लिया गया। एक ओर पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में भीड़ को नियंत्रित करने में जुटी है, तो दूसरी ओर प्रदर्शन से जुड़ी हिरासतों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज कर दी है। राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं ।












