नई दिल्ली: कभी किसी परिवार की आंखों में संतान की चाहत के आंसू थे तो किसी के दिल में वर्षों से एक नन्ही किलकारी सुनने का इंतजार। उम्मीद और चिकित्सा विज्ञान के इसी संगम ने शनिवार को वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल में एक ऐसा अध्याय लिख दिया जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग ने आईवीएफ के जरिए जन्म लेने वाले अपने 100वें शिशु के जन्म के साथ एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। 3 अक्टूबर 2026 का दिन अस्पताल के लिए इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसी तारीख को भारत के पहले आईवीएफ शिशु कनुप्रिया अग्रवाल जिन्हें प्यार से ‘दुर्गा’ के नाम से जाना जाता है का जन्म वर्ष 1978 में कोलकाता में हुआ था। भारत में आईवीएफ की नींव रखने वाले चिकित्सक डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए सफदरजंग अस्पताल ने भी इसी दिन अपनी आईवीएफ यात्रा के 100वें सफल जन्म का जश्न मनाया।
सिर्फ आंकड़ा नहीं, 100 परिवारों की खुशियों की कहानी
सफदरजंग अस्पताल के आईवीएफ केंद्र की यह उपलब्धि महज एक संख्या नहीं है, बल्कि उन परिवारों की उम्मीद, भरोसे, संघर्ष और खुशियों की कहानी है, जिन्होंने माता-पिता बनने के सपने को साकार करने के लिए चिकित्सा विज्ञान का सहारा लिया। अस्पताल में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आईवीएफ के माध्यम से जन्म लेने वाले बच्चे अपने माता-पिता के साथ पहुंचे तो माहौल भावुक हो उठा। जिन बच्चों को कभी आईवीएफ उपचार की प्रक्रिया के दौरान उम्मीद की नन्ही किरण के रूप में देखा गया था उन्हीं बच्चों को आज स्वस्थ और मुस्कुराते हुए अपने सामने देखकर चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के चेहरे पर भी खुशी साफ नजर आई। परिवारों की मौजूदगी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को और खास बना दिया।
आईयूआई से आईवीएफ और आईसीएसआई तक सेवाएं
वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल का आईवीएफ केंद्र दंपतियों को संतान प्राप्ति की दिशा में आधुनिक और व्यापक सहायक प्रजनन सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। यहां अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (आईयूआई) इन-विट्रो निषेचन (आईवीएफ) और इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल का यह केंद्र उन दंपतियों के लिए उम्मीद की किरण बना है, जो किसी कारणवश प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने टीम को दी बधाई
इस ऐतिहासिक अवसर पर वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता शर्मा ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आईवीएफ के जरिए जन्म लेने वाले बच्चों को उनके परिवारों के साथ अस्पताल में वापस देखकर बेहद संतोष और खुशी मिलती है। उन्होंने अस्पताल पर भरोसा जताने वाले सभी परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया और आईवीएफ टीम के समर्पण, मेहनत और मरीजों की देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ अस्पताल की नहीं, बल्कि उन सभी परिवारों की भी है, जिन्होंने विश्वास और उम्मीद के साथ इस यात्रा में कदम रखा।
मेडिकल अधीक्षक डॉ. चारू बंबा ने बढ़ाया हौसला
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारू बंबा ने आईवीएफ के जरिए माता-पिता बने सभी परिवारों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए पूरी आईवीएफ टीम की सराहना करते हुए कहा कि विशेष सहायक प्रजनन सेवाओं को निरंतर बेहतर तरीके से उपलब्ध कराना अस्पताल की प्राथमिकताओं में शामिल है।
डॉ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को भी किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योत्स्ना सूरी के योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। आईवीएफ कार्यक्रम के निरंतर संचालन में उनके योगदान की सराहना की गई।वहीं कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ. सरिता शम्सुंदर ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम की कार्यवाही को आगे बढ़ाया।
डॉ. बिंदु बजाज ने संभाली कार्यक्रम की कमान
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का नेतृत्व एवं समन्वय डॉ. बिंदु बजाज प्रभारी आईवीएफ एवं प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष ने किया। आईवीएफ केंद्र के संचालन और विकास से लंबे समय से जुड़ी डॉ. बजाज ने 100वें सफल आईवीएफ जन्म के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की योजना और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में डॉ. पंकज तलवार डॉ. सुधा प्रसाद और डॉ. बनश्री दास सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने शिरकत की।
डॉक्टरों से लेकर नर्सों तक, सभी की मेहनत का नतीजा
इस सफलता के पीछे केवल एक डॉक्टर या एक विभाग नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य टीम की सामूहिक मेहनत रही। डॉ. गरिमा, डॉ. दिव्या और डॉ. रीता सहित आईवीएफ टीम तथा सिस्टर लेथा और उनकी टीम ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। आईवीएफ की इस पूरी यात्रा में चिकित्सकों, नर्सों, भ्रूण विशेषज्ञों, तकनीशियनों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। 100वें सफल जन्म तक पहुंचना इसी सामूहिक समर्पण और लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है।
जब अस्पताल में लौटे ‘उम्मीद के बच्चे’
कार्यक्रम का सबसे भावुक पल तब आया, जब आईवीएफ के जरिए जन्म लेने वाले बच्चे अपने परिवारों के साथ अस्पताल पहुंचे। कभी जिन परिवारों के लिए संतान का सपना अधूरा था आज उन्हीं की गोद में खेलते बच्चों ने पूरे माहौल को खुशियों से भर दिया। इन बच्चों की मुस्कान मानो यह संदेश दे रही थी कि उम्मीद की डोर अगर मजबूत हो और चिकित्सा विज्ञान का साथ मिले तो मुश्किल से मुश्किल सपना भी हकीकत में बदला जा सकता है। सफदरजंग अस्पताल में आईवीएफ से जन्म लेने वाले 100वें बच्चे की उपलब्धि ने अस्पताल की चिकित्सा यात्रा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। यह शतक उन परिवारों के लिए भी उम्मीद का संदेश है, जो माता-पिता बनने के सपने को लेकर चिकित्सा सहायता की तलाश में हैं। 100वीं किलकारी के साथ सफदरजंग अस्पताल ने सिर्फ एक आंकड़ा पूरा नहीं किया बल्कि 100 परिवारों की खुशियों, उम्मीदों और नए जीवन की कहानी को अपने इतिहास में दर्ज कर लिया।












