नई दिल्ली: दिल्ली में अब गोबर नालियों में बहकर यमुना को मैला नहीं करेगा बल्कि उसी गोबर से स्वच्छ ऊर्जा और प्राकृतिक खाद तैयार होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को नजफगढ़ स्थित गोयला डेयरी में 16 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन कर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता वाला यह संयंत्र अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन में बदलने के साथ पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी मददगार बनेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए केवल नदी की सफाई पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रदूषण के स्रोत पर रोक लगाना जरूरी है। गोयला डेयरी का संयंत्र इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘कचरे से कमाई’ और अपशिष्ट से संपदा निर्माण के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए दिल्ली सरकार स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे रही है।
तीन संयंत्र शुरू, छह और तैयार करने की योजना
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले डेढ़ वर्ष में दिल्ली में तीन बायोगैस संयंत्र शुरू किए गए हैं, जबकि छह अन्य संयंत्रों पर काम जारी है। नंगली सकरावती संयंत्र में एक वर्ष के दौरान 55 हजार टन गोबर का उपयोग किया गया और किसानों को साढ़े तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। डेयरी क्षेत्रों में नालियों और जल निकासी व्यवस्था सुधारने के लिए 50 करोड़ रुपये का कोष भी उपलब्ध कराया गया है।
रोज बनेगी गैस, खेतों को मिलेगी खाद
गोयला डेयरी संयंत्र से प्रतिदिन लगभग 14 हजार घन मीटर कच्ची बायोगैस और करीब 5.6 टन शुद्ध संपीड़ित बायोगैस उत्पादन का अनुमान है। इसकी आपूर्ति पाइपलाइन के माध्यम से इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड को की जाएगी। प्रसंस्करण के बाद बचने वाली जैविक खाद कृषि भूमि की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होगी। परियोजना के तहत गोबर 67 पैसे प्रति किलोग्राम की दर से एकत्र किया जाएगा।
बहाने नहीं नतीजे चाहिए: आशीष सूद
कैबिनेट मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली अब बहानों और देरी की नहीं बल्कि ठोस काम और परिणामों की राजनीति चाहती है। महापौर प्रवेश वाही, उपमहापौर डॉ. मोनिका पंत और विधायक संदीप सहरावत सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Reported By: Pankaj Rai












