अहंकार छोड़ो, ट्रैफिक घटाओ और प्रदूषण मिटाओ… इस बार रावण देगा दिल्ली को तीन बड़े संदेश

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नई दिल्ली: हर साल रावण जलता है आतिशबाजी होती है और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश गूंजता है। लेकिन इस बार लाल किले के मैदान में रावण के दहन से पहले दिल्लीवालों को मिलेगा एक ऐसा संदेश जो सीधे उनके दिल और दिमाग पर दस्तक देगा।विश्वविख्यात लव कुश रामलीला कमेटी ने इस बार रावण के पुतले को केवल बुराई के प्रतीक के रूप में नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाले संदेशवाहक के रूप में पेश करने की तैयारी की है। रावण अपनी आखिरी विदाई से पहले दिल्लीवासियों से तीन बड़ी अपील करेगा—अपने भीतर के अहंकार का अंत करो, यातायात का दबाव घटाओ और प्रदूषण से राजधानी को मुक्ति दिलाओ।

लाल किला मैदान में आयोजित भव्य रामलीला के लिए इस बार 110 फीट ऊंचा रावण 100 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 90 फीट ऊंचा मेघनाद तैयार किए गए हैं। इन विशालकाय पुतलों का दहन जहां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा वहीं रावण के दहन से पहले दिए जाने वाले सामाजिक संदेश इस आयोजन को एक नई पहचान देंगे।

पहला संदेश: रावण बाहर नहीं, हमारे भीतर भी है

लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि पहली बार रावण के पुतले के माध्यम से दिल्लीवासियों को अहंकार छोड़ने का संदेश दिया जाएगा। रावण की आवाज में यह बात सुनाई देगी कि हर साल मैं तो जल जाता हूं, लेकिन इंसान के भीतर छिपा अहंकार जिंदा रह जाता है। संदेश साफ होगा रावण का अंत केवल पुतला जलाने से नहीं बल्कि अपने भीतर के घमंड, क्रोध और बुराइयों को खत्म करने से होगा।

दूसरा संदेश: ट्रैफिक के जाल से निकालो दिल्ली को

राजधानी की सड़कों पर बढ़ते वाहनों और यातायात के दबाव को देखते हुए रावण का दूसरा संदेश यातायात व्यवस्था से जुड़ा होगा। दिल्लीवासियों से अपील की जाएगी कि वे निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने और यातायात को सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। रामलीला के मंच से निकलने वाला यह संदेश लोगों को याद दिलाएगा कि सड़क पर अनुशासन और जिम्मेदारी निभाना भी समाज के प्रति हमारा कर्तव्य है।

तीसरा संदेश: प्रदूषण मिटाओ आने वाली पीढ़ी को बचाओ

रावण का तीसरा संदेश राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर होगा। दूषित हवा से लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए दिल्लीवासियों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की अपील की जाएगी। संदेश में भावी पीढ़ियों के भविष्य की चिंता भी शामिल होगी। साफ हवा और स्वच्छ वातावरण केवल आज की जरूरत नहीं बल्कि आने वाले कल की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। रावण के माध्यम से लोगों को यह समझाने की कोशिश होगी कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं बल्कि हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी है।

तीर श्रीराम का लगेगा, संदेश समाज के नाम जाएगा

लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार के मुताबिक इस बार रावण का दहन तकनीक और भव्यता के लिहाज से भी खास होगा। श्रीराम का तीर लगने के बाद रावण की नाभि से अमृत निकलने का दृश्य दिखाया जाएगा। उसकी दोनों मटकती आंखों से आग बरसती नजर आएगी और गले में पड़ी 11 चमकदार मालाओं के रंग बदलेंगे। भव्य पुतलों आकर्षक तकनीकी प्रभावों और सामाजिक जागरूकता के संदेशों के संग लाल किला मैदान की रामलीला दर्शकों को रोमांच और सीख, दोनों का अनुभव कराने की तैयारी में है। इस बार संदेश केवल इतना नहीं होगा कि बुराई पर अच्छाई की जीत हुई, बल्कि यह भी कि असली विजय तभी होगी, जब इंसान अपने भीतर की बुराइयों को हराएगा, दिल्ली की सड़कों को जाम से राहत दिलाएगा और अपनी सांसों के लिए स्वच्छ हवा बचाएगा।

 

Reported By: Pankaj Rai

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