नई दिल्ली: राजधानी के प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर जारी आंदोलन ने शनिवार को नया मोड़ ले लिया। परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखे जाने, कथित तोड़फोड़ और विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ते तनाव को लेकर विश्वविद्यालय के शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने कड़ा विरोध जताया। हालात को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने की घोषणा कर दी है। प्रशासन ने विद्यार्थियों से ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने और अगले आदेश तक परिसर आने से बचने की अपील की है।
शनिवार सुबह विश्वविद्यालय के अंसारी सभागार के लॉन में आयोजित बैठक में कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ, कुलसचिव प्रोफेसर मोहम्मद महताब आलम रिजवी और 1500 से अधिक शिक्षक एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी शामिल हुए। बैठक में परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने आंदोलन समाप्त कराने और विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा बनाए रखने को लेकर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में सर्वसम्मति से दो प्रस्ताव पारित किए गए।
दीवारों पर नारों को लेकर शिक्षकों का कड़ा रुख
विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने परिसर की दीवारों पर लिखे गए आपत्तिजनक नारों तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि इस प्रकार की गतिविधियां 106 वर्षों की ऐतिहासिक विरासत वाले संस्थान की शैक्षणिक गरिमा और प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकती हैं।
पहले प्रस्ताव में प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से आंदोलन समाप्त कर धरना स्थल खाली करने और परिसर में शांति एवं सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की गई। कर्मचारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान गेट संख्या 18 है, जबकि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों द्वारा गालिब प्रतिमा के निकट स्थित लॉन में धरना दिए जाने पर आपत्ति जताई गई।
दूसरे प्रस्ताव में दीवारों पर लिखे गए नारों को मिटाने और प्रभावित दीवारों पर दोबारा रंग-रोगन करने का संकल्प लिया गया। शिक्षकों और कर्मचारियों ने कहा कि किसी भी संस्थान की प्रतिष्ठा को कुछ लोगों की गतिविधियों के कारण नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित की जा रही कथित भ्रामक सूचनाओं पर भी चिंता व्यक्त की।
दो दशक पुराने विवाद के समाधान की कोशिश
विश्वविद्यालय में छात्रसंघ की बहाली को लेकर विवाद नया नहीं है। वर्ष 2006 में बार-बार होने वाली हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में व्यवधान की घटनाओं के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ को निलंबित कर दिया गया था।
वर्तमान विवाद के समाधान के लिए 18 अक्टूबर को विश्वविद्यालय के सात प्रोफेसरों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई थी। समिति पिछले कई दिनों से प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से बातचीत कर रही थी। अब तक चार दौर की वार्ता हो चुकी थी। समिति ने शुक्रवार रात भी विद्यार्थियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील की थी, लेकिन सहमति नहीं बन सकी।
समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रशासन ने 21 अक्टूबर को छात्रसंघ के संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित करने की अधिसूचना जारी की थी। शिक्षकों के अनुसार, वर्ष 2006 के बाद छात्रसंघ से संबंधित इस दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल थी।
इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने 21 अक्टूबर को एक अन्य अधिसूचना जारी कर 12 अक्टूबर से 21 अक्टूबर को शाम 5:30 बजे तक आंदोलन से संबंधित कारणों के आधार पर विद्यार्थियों के विरुद्ध की गई या शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा करने की बात कही थी। इसके बावजूद आंदोलनकारी विद्यार्थियों के साथ बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
समझाने पहुंचे शिक्षक, दो घंटे बाद लौटना पड़ा
शनिवार को बैठक में प्रस्ताव पारित करने के बाद शिक्षक और कर्मचारी अंसारी सभागार के लॉन से मार्च करते हुए गेट संख्या 13 से मुख्य सड़क पार कर गेट संख्या 7 पहुंचे। इसके बाद वे प्रदर्शन स्थल पर गए और विद्यार्थियों से आंदोलन समाप्त कर शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य करने की अपील की। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी विवरण के अनुसार, करीब दो घंटे तक विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने नारेबाजी करते हुए शिक्षकों को वापस जाने के लिए कहा और अचानक सुरक्षा कर्मचारियों, शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों को धक्का देना शुरू कर दिया।
वरिष्ठ शिक्षकों की बार-बार अपील के बावजूद जब स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो शिक्षक और कर्मचारी प्रदर्शन स्थल से वापस लौटकर अंसारी सभागार पहुंच गए। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया।
परिसर के द्वार और पुस्तकालय रहेंगे बंद
विश्वविद्यालय प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार, तत्काल प्रभाव से सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों की सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है। प्रशासन ने विद्यार्थियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी निर्धारित ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल हों और अगले आदेश तक विश्वविद्यालय परिसर आने से बचें। ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहने की अवधि में विश्वविद्यालय के द्वार और पुस्तकालय बंद रहेंगे। आगे की व्यवस्था को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से अलग से सूचना जारी की जाएगी।
जामिया में जारी इस घटनाक्रम ने छात्रसंघ चुनाव की मांग विद्यार्थियों के आंदोलन, परिसर में अनुशासन और शैक्षणिक माहौल की बहाली से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के बीच सहमति बनना बाकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बातचीत के जरिए विवाद का समाधान निकलता है या परिसर में तनाव और लंबा खिंचता
Reported By: Pankaj Rai












