नई दिल्ली: असत्य पर सत्य अधर्म पर धर्म और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक विजयादशमी का पर्व मंगलवार को राजधानी दिल्ली में पूरे उत्साह उमंग और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। ऐतिहासिक लाल किला मैदान से लेकर द्वारका सेक्टर-10 तक दशहरे की धूम देखने को मिली। आसमान में उठती आतिशबाजी, रावण के विशाल पुतलों का दहन और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी जयघोष ने राजधानी के वातावरण को राममय बना दिया। इस अवसर पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अलग-अलग दशहरा समारोहों में भाग लेकर देशवासियों को सत्य, सदाचार, सामाजिक समरसता और बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने का संदेश दिया। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने और समाज में फैली बुराइयों को समाप्त करने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संदेश—श्रीराम के आदर्शों से मजबूत होगा भारत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित दशहरा समारोह में भाग लिया और देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान श्रीराम को धर्म, सत्य और नैतिक आचरण का आदर्श स्वरूप बताते हुए रामलीला की परंपरा के महत्व को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश और विदेश में रामलीलाओं के माध्यम से लोग भगवान श्रीराम के महान आदर्शों और जीवन-मूल्यों का स्मरण करते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज का भारत भगवान श्रीराम की कथा में निहित समानता और समावेशिता के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट था कि विजयादशमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में सत्य, नैतिकता और सदाचार को अपनाने का अवसर भी है। भगवान श्रीराम के आदर्श समाज को एकता, मर्यादा और मानवीय मूल्यों के सूत्र में बांधने की प्रेरणा देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया रामराज्य का मूल मंत्र जनकल्याण सर्वोपरि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित दशहरा समारोह में भाग लेकर विजयादशमी के पर्व का संदेश देशवासियों तक पहुंचाया। उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण होना चाहिए। प्रधानमंत्री का यह संदेश शासन व्यवस्था में सेवा, संवेदनशीलता और जनहित के महत्व को रेखांकित करता है। भगवान श्रीराम का जीवन इस बात की प्रेरणा देता है कि शक्ति का उपयोग अहंकार के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण और न्याय की स्थापना के लिए किया जाना चाहिए। विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री का संदेश इस मूल भावना को सामने लाता है कि देश की प्रगति तभी सार्थक है, जब विकास का लाभ आम नागरिक तक पहुंचे और समाज में न्याय, सद्भाव तथा जिम्मेदारी की भावना मजबूत हो।
लाल किले पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया रावण दहन, यामी गौतम और आनंद एल राय भी बने साक्षी
राजधानी के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में विश्व प्रसिद्ध लव कुश रामलीला समिति की ओर से आयोजित विजयादशमी समारोह आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। यहां उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने परंपरागत रूप से तीर चलाकर रावण के पुतले का दहन किया। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेत्री यामी गौतम धर और प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक आनंद एल राय ने भी बुराई के प्रतीक पुतलों पर तीर चलाकर समारोह में सहभागिता की। हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों और श्रद्धालुओं ने ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष के साथ इस भव्य आयोजन का आनंद लिया। रावण के पुतले के दहन के साथ पूरा मैदान तालियों, जयकारों और उत्साह से गूंज उठा। विशाल पुतलों की लपटों ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अहंकार, अन्याय और बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखाई दें, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। इस वर्ष लव कुश रामलीला की विशेष थीम महिला सम्मान रखी गई थी। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से अभिनेत्री यामी गौतम को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। उन्होंने समारोह में देश की महिलाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए बुराई के प्रतीक पुतले पर तीर चलाया और नारी शक्ति, साहस, गरिमा तथा महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। फिल्मी दुनिया की चमक और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का यह संगम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बना। लव कुश रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने कहा कि उपराष्ट्रपति की उपस्थिति और रावण दहन में उनकी सहभागिता समिति के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष महिला सम्मान को केंद्र में रखकर यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि महिलाएं केवल ममता और त्याग की प्रतीक नहीं, बल्कि अन्याय और बुराई के खिलाफ खड़ी होने वाली सशक्त शक्ति भी हैं। अर्जुन कुमार ने कहा कि रावण केवल पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और समाज में व्याप्त बुराइयों का प्रतीक भी है। विजयादशमी हमें सिखाती है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है। उन्होंने अभिनेत्री यामी गौतम और फिल्म निर्माता आनंद एल राय की सहभागिता के लिए भी आभार व्यक्त किया।लाल किला मैदान में आयोजित इस समारोह ने धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और महिला सम्मान का संदेश एक साथ प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की दोटूक—केवल पुतला जलाने से नहीं, बुराइयां मिटाने से होगा असली दशहरा
द्वारका सेक्टर-10 स्थित श्रीरामलीला एवं विजयादशमी समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि विजयादशमी केवल भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और सदाचार की बुराई, अधर्म, अन्याय और अहंकार पर जीत का प्रतीक है। सदियों से यह पर्व हमें प्रेरणा देता आ रहा है कि सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर हमेशा विजय होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम केवल हमारे आराध्य नहीं, बल्कि जीवन के आदर्श हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण का वध कर अधर्म का अंत किया। लेकिन आज के समाज में भी ऐसी अनेक बुराइयां मौजूद हैं, जिनका खात्मा करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना होगा। उन्होंने अंधकार, अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, भ्रष्टाचार, नशा, अपराध, सामाजिक भेदभाव, महिलाओं पर अत्याचार और नफरत को समाज के सामने बड़ी चुनौतियां बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बुराइयों का अंत तभी संभव है, जब लोग अपने भीतर श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करें और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।मुख्यमंत्री के संबोधन का मूल संदेश था कि दशहरा केवल रावण के पुतले को जलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हर व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अहंकार, द्वेष, लालच और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। यही पर्व की वास्तविक सार्थकता है।
नफरत का अंधेरा मिटे, प्रेम का दीप जले
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने देश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए समाज से नफरत समाप्त कर प्रेम का दीप जलाने का आह्वान किया। उन्होंने लोगों से समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने और देशविरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी भारतीयों को मिलकर देश की प्रगति और उज्ज्वल भविष्य के लिए काम करना चाहिए। विजयादशमी का पर्व हमें आत्ममंथन करने, अपने भीतर की कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने लोगों से भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए अपने आसपास मौजूद बुराइयों को खत्म करने में योगदान देने तथा देश की तरक्की के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
रावण के दस सिर और आज की दस चुनौतियां
विजयादशमी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना सदियों पहले था। रावण के दस सिर प्रतीकात्मक रूप से उन बुराइयों की याद दिलाते हैं, जो व्यक्ति और समाज को कमजोर करती हैं। अहंकार, भ्रष्टाचार, नफरत, अन्याय, लालच, क्रोध, भेदभाव, नशा, अपराध और महिलाओं के प्रति असम्मान जैसी चुनौतियों पर विजय पाना आज की सामाजिक आवश्यकता है।राष्ट्रपति ने मर्यादा, नैतिकता और समावेशिता का संदेश दिया। प्रधानमंत्री ने जनकल्याण को शासन का मूल उद्देश्य बताया। उपराष्ट्रपति ने लाल किले पर रावण दहन के माध्यम से विजयादशमी की परंपरा में सहभागिता की, जबकि मुख्यमंत्री ने समाज को बुराइयों के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। लव कुश रामलीला के मंच से महिला सम्मान और नारी शक्ति का संदेश भी प्रमुखता से सामने आया। इस तरह राजधानी में मनाई गई विजयादशमी ने एक बार फिर यह याद दिलाया कि असली विजय केवल बुराई के पुतले को जलाने में नहीं, बल्कि अपने विचारों, व्यवहार और कर्मों से बुराई को समाप्त करने में है।
Reported By: Pankaj Rai












