बांके बिहारी मंदिर में लपकों पर कार्रवाई से पहले होगी पहचान, प्रसाद की नियमित जांच पर सहमति

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वृंदावन: ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंध समिति की बैठक में श्रद्धालुओं की सुविधाओं, प्रसाद की गुणवत्ता और मंदिर के आसपास सक्रिय लपकों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। बुधवार को शहीद लक्ष्मण सभागार में हुई समिति की 20वीं बैठक में कई प्रस्तावों पर चर्चा हुई। हालांकि, एजेंडे में शामिल कुछ बिंदुओं पर गोस्वामी सदस्यों ने सवाल उठाते हुए दोबारा विचार करने की जरूरत बताई।

प्रसाद की शुद्धता और वातानुकूलन पर चर्चा

समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंदिर के प्रसाद और आसपास प्रसाद के रूप में बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। इसके तहत नियमित रूप से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच कराने पर जोर दिया गया। श्रद्धालुओं को गर्मी और भीड़ से राहत दिलाने के लिए मंदिर परिसर को केंद्रीय वातानुकूलित करने का मुद्दा भी उठा। राजभोग सेवायत रजत गोस्वामी ने कहा कि इस प्रस्ताव पर पूर्व की बैठकों में भी चर्चा हो चुकी है, लेकिन अभी तक अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता जताई।

चांदी के सिंहासन, रथ और शेषनाग मामले पर सवाल

बैठक में चांदी के सिंहासन, रथ और शेषनाग से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई। सदस्य हिमांशु गोस्वामी और रजत गोस्वामी ने इन वस्तुओं की जांच के लिए गठित समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जांच समिति की ओर से अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित चांदी की वस्तुएं मंदिर की परंपरागत व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि गोस्वामी समाज की ओर से फूल बंगला की झांकियों में इनका इस्तेमाल किया जाता रहा है। सदस्यों ने यह भी ध्यान दिलाया कि शिकायत करने वाला पक्ष अब तक समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष नहीं रख सका है।

लपकों पर अंकुश लगाने का प्रस्ताव

मंदिर के आसपास श्रद्धालुओं को अपने साथ ले जाने के लिए सक्रिय रहने वाले लपकों पर अंकुश लगाने के प्रस्ताव पर भी सदस्यों ने अपनी राय रखी। रजत गोस्वामी ने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन पहले उनकी पहचान सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि वृंदावन सहित अन्य तीर्थस्थलों पर पीढ़ियों से तीर्थ पुरोहित अपने यजमानों को दर्शन कराने और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराने का कार्य करते आ रहे हैं। इसके अलावा गोस्वामियों की अनुपस्थिति में उनके कर्मचारी भी श्रद्धालुओं को दर्शन कराने ले जाते हैं। ऐसे में पारंपरिक रूप से यह कार्य करने वालों और लपकों के बीच अंतर स्पष्ट करने के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। इस पर समिति के अध्यक्ष ने विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक के बाद समिति के सचिव और जिलाधिकारी चंद्रप्रकाश सिंह ने बताया कि 20वीं बैठक में विभिन्न बिंदुओं पर आपसी सहमति से चर्चा की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

 

Reported By: Prem Kaushik

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