नई दिल्ली: पितृ पक्ष के खत्म होते ही घरों में फिर से उत्सव की रौनक लौटने वाली है, क्योंकि अक्टूबर का महीना इस बार धार्मिक रूप से बेहद खास साबित होने जा रहा है। मां दुर्गा की आराधना का नौ दिवसीय महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा।
नवरात्र के पहले दिन यानी 11 अक्टूबर को घटस्थापना की जाएगी, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। इसी दिन से घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की विधिवत पूजा का सिलसिला शुरू होगा, और साथ ही जौ बोने की परंपरा भी निभाई जाती है। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार इस दिन घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक माना गया है। हालांकि यह समय अलग-अलग शहरों में कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग देखना बेहतर रहेगा।
नौ दिनों का पूरा कैलेंडर
11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी से जुड़े विशेष अनुष्ठान होंगे, और अगले दिन यानी 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस साल तिथियों के संयोग के चलते दुर्गा अष्टमी और महानवमी के अनुष्ठान एक ही दिन, यानी 19 अक्टूबर को पड़ रहे हैं। पंचांग के मुताबिक इसी दिन दोनों तिथियों से जुड़ी पूजा संपन्न की जाएगी, जिसके अगले दिन ही विजयादशमी मनाई जाएगी।
नौ दिन, नौ स्वरूप
नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री शामिल हैं। मान्यता है कि इन दिनों शक्ति की आराधना से भक्तों को साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है, और लोग अपनी श्रद्धा अनुसार व्रत रखकर मां की पूजा करते हैं।
नवरात्र के नौ दिनों के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। रामायण के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था, और इसी वजह से देशभर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
घटस्थापना में रखें इन बातों का ध्यान
घटस्थापना को नवरात्र का सबसे अहम अनुष्ठान माना जाता है, इसलिए इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। सबसे पहले पूजा स्थल साफ किया जाता है, फिर कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते रखे जाते हैं और उस पर नारियल स्थापित किया जाता है। यह मुहूर्त स्थानीय सूर्योदय और पंचांग पर निर्भर करता है, इसलिए मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में इसके समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।












