नई दिल्ली: भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रदर्शनकारी युवाओं और ‘Gen-Z’ को लेकर की गई विवादित टिप्पणी पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कड़ा ऐतराज जताया है। एक निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में रामदेव ने कंगना के बयान को सीधे तौर पर ‘विकृत मानसिकता’ की निशानी करार दिया। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि देश के नौजवानों को इस तरह के अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना पूरी तरह से अनुचित है। योग गुरु ने किसी का नाम लिए बिना यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को अपनी ही पार्टी के ऐसे बयानवीर नेताओं की बयानबाजी पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए और उनके खिलाफ उचित कदम उठाने चाहिए।
कारनामों पर साधा निशाना
बाबा रामदेव ने सांसद के अतीत और व्यक्तिगत आचरण पर भी उंगली उठाई। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का बचपन और जवानी कैसी रही है तथा उसके पूर्व के कारनामे कैसे रहे हैं, यह सबको पता है।
रामदेव ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उनकी या उनके योग की तारीफ करता है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे उस व्यक्ति के गुनाहों पर पर्दा डालेंगे।
क्या था पूरा विवाद
दरअसल, सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान संसद में कंगना रनौत ने प्रदर्शनकारी लड़कियों पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘गटरछाप’ कहा था और उनके चरित्र पर सवाल उठाए थे। इस बयान के बाद संसद से लेकर सड़क तक विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया था। चौतरफा हमलों के बावजूद कंगना अपने बयान से पीछे नहीं हटी थीं और पलटवार करते हुए कहा था कि कॉकरोच गटर से ही निकलते हैं। इसी बयान की पृष्ठभूमि में बाबा रामदेव ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बाबा रामदेव ने कहा युवा किसी एक जाति या समुदाय से नहीं आते, बल्कि हर वर्ग के बच्चे इसका हिस्सा हैं। युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं और इस सच्चाई को कोई झुठला नहीं सकता।
अराजकता पर बेबाक बोल
कंगना विवाद के अलावा रामदेव ने देश के अन्य समसामयिक और कूटनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने धर्मांतरण पर कहा कि सनातन संस्कृति इतनी समृद्ध है कि किसी को अन्य धर्म अपनाने की आवश्यकता ही नहीं है। वहीं, महबूबा मुफ्ती के बयानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बोलने की आजादी का इस्तेमाल देश में बौद्धिक अराजकता फैलाने के लिए नहीं होना चाहिए। रामदेव के अनुसार, आज देश में न तो हिंदू धर्म खतरे में है और न ही कोई अन्य मजहब, बल्कि असली जरूरत देश को धार्मिक विवादों से निकालकर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की है।












