नई दिल्ली: नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग को लेकर मामला गरमाता नजर आ रहा है. बता दें, पहले जहां ये मांग केवल धार्मिक संगठनों द्वारा की जा रही थी. वहीं अब आम नागरिक भी अपने जनप्रतिनिधियों से इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग कर रहे हैं. यही वजह है कि कई स्थानों पर लोगों ने सांसदों का घेराव कर हिंदू समुदाय की सुरक्षा, अधिकारों और नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने के मुद्दे पर खुलकर बोलने की अपील की है.
स्थानीय लोगों ने किया सांसद बबलू का विरोध
इसी क्रम में सिरहा जिले में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद बबलू गुप्ता को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उन्होंने बदलाव और नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र बनाने की उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को समर्थन दिया था, लेकिन उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप कदम नहीं उठाए जा रहे हैं. इसी विषय को लेकर लोगों ने सांसद से इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
हिंदूवादी संगठनों ने सरकार के सामने रखा मांगपत्र
दूसरी ओर, 26 जुलाई की रात सुनसरी जिले के देवानगंज क्षेत्र से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं. प्रशासन के अनुसार अधिकांश प्रभावित इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना के बाद हिंदूवादी संगठनों ने सरकार के सामने 15 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत किया है.
मांगपत्र में देवानगंज हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों और कथित साजिशकर्ताओं की जल्द गिरफ्तारी करने तथा जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है. इसके अलावा गोली चलाने के आदेश देने वाले अधिकारियों की पहचान उजागर कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कदम उठाने की भी मांग रखी गई है.
पाकिस्तानी घुसपैठियों को बाहर निकालों
संगठनों ने हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों को शहीद का दर्जा देने, उनके परिजनों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराने और घायलों के लिए निशुल्क एवं बेहतर इलाज सुनिश्चित करने की भी मांग की है. इसके साथ ही नेपाल को बौद्ध और किरात परंपराओं के सम्मान के साथ वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए संसद में प्रस्ताव लाने की अपील की गई है. मांगपत्र में रोहिंग्या, बांग्लादेशी और पाकिस्तानी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें निष्कासित करने, सीमा सुरक्षा मजबूत करने तथा वर्ष 1990 के बाद जारी नेपाली नागरिकताओं की जांच कराने की मांग भी शामिल है.
प्रधानमंत्री बालेन शाह ने क्या कहा
वहीं, प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस मुद्दे पर कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली का प्रश्न राजशाही की बहाली से भी जुड़ा हुआ है. उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा कोई निर्णय उचित नहीं होगा. उन्होंने दोहराया कि सरकार संघीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनका मानना है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र घोषित करने से संघीय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.












