नई दिल्ली: नवरात्रि में देशभर में मां दुर्गा की भक्ति का रंग देखने को मिल रहा है। गुजरात में गरबा और डांडिया के बीच एक ऐसी परंपरा भी लोगों का ध्यान खींच रही है, जिसमें भक्ति के साथ वीरता का अनोखा संगम नजर आता है। राजकोट और जामनगर में राजपूत महिलाओं ने पारंपरिक तलवार रास का प्रदर्शन किया। पारंपरिक कपड़ों में सजी महिलाओं के हाथों में चमचमाती तलवारें और चेहरे पर आत्मविश्वास देखते ही बन रहा था। इस दौरान महिलाओं ने अपने शौर्य और हुनर का प्रदर्शन किया। राजकोट में जीप चलाते हुए तलवारबाजी की प्रस्तुति ने भी लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी।
राजकोट में तलवार रास ने खींचा ध्यान
राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं कई वर्षों से तलवार रास की परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। यह आयोजन प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को जीवित रखने की कोशिश का हिस्सा है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ अलग-अलग दांव और करतब दिखाती हैं।
#WATCH | Rajkot, Gujarat: Kshatriya Rajput women performed the traditional Sword Raas at Rajvi Palace during Navratri, displaying sword-fighting skills while riding bikes and jeeps. (12.10) https://t.co/DhkKCO9R5o
— ANI (@ANI) October 12, 2026
इस प्रस्तुति में हिस्सा लेने वाली महिलाओं के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है। जिन महिलाओं को पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता, उन्हें भी प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकें।
डेढ़ महीने पहले शुरू हो जाती है तैयारी
आयोजन से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि तलवार रास के लिए नवरात्रि से करीब एक से डेढ़ महीने पहले अभ्यास शुरू कर दिया जाता है। तलवार का वजन अधिक होने के कारण शुरुआत में इसे संभालना आसान नहीं होता। लगातार अभ्यास से महिलाएं इसके दांव-पेंच सीखती हैं और प्रदर्शन के दौरान तालमेल बनाए रखती हैं। करीब 18-19 साल से राजकोट में यह परंपरा निभाई जा रही है। हर साल इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
जामनगर की हाथी कॉलोनी स्थित आशापुरा गरबी मंडल में भी युवतियों ने तलवार रास प्रस्तुत किया। आयोजक गिरीश पांड्या के मुताबिक, यहां लगभग 45 साल से गरबा आयोजित हो रहा है, जबकि तलवार रास की परंपरा करीब 20 साल पुरानी है।
महिला सशक्तीकरण का संदेश
तलवार रास केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि महिलाओं की शक्ति, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा का संदेश भी देता है। मां जगदंबा के स्वरूप से प्रेरित होकर महिलाएं इस परंपरा के जरिए अपनी क्षमता का प्रदर्शन करती हैं। गुजरात की यह अनूठी परंपरा नवरात्रि के उत्सव में भक्ति के साथ वीरता का रंग भी भर रही है।












