नई दिल्ली: किसी मां की आंखें दरवाजे पर टिकी थीं किसी पिता की नजर हर गुजरते चेहरे में अपने बच्चे को तलाश रही थी तो किसी परिवार के लिए हर गुजरता दिन चिंता और बेचैनी लेकर आ रहा था। लेकिन जब दिल्ली पुलिस ने तलाश का बीड़ा उठाया तो उम्मीद ने फिर से दस्तक दी। दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के ‘ऑपरेशन मिलाप’ ने सितंबर महीने में 80 गुमशुदा लोगों को उनके परिवारों से मिलाकर कई घरों में फिर से खुशियां लौटा दीं।
दक्षिण-पश्चिम जिला डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस ने कुल 80 गुमशुदा लोगों को तलाश किया, जिनमें 22 गुमशुदा या अपहृत बच्चे और 58 वयस्क शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी को सुरक्षित बरामद कर उनके परिवारों से मिलाया।

एक महीने में 80 घरों में लौटी खुशी
पुलिस के मुताबिक, गुमशुदगी की सूचना मिलते ही संबंधित थानों की टीमों ने तलाश शुरू कर दी। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, ऑटो और ई-रिक्शा स्टैंड समेत सार्वजनिक स्थानों पर गुमशुदा लोगों के फोटो दिखाए गए। बस चालकों, परिचालकों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई। इसके साथ ही स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया तथा आसपास के थानों और अस्पतालों के रिकॉर्ड भी खंगाले गए। अलग-अलग सुरागों को जोड़ते हुए पुलिस टीमों ने गुमशुदा लोगों तक पहुंचने का प्रयास जारी रखा और आखिरकार 80 लोगों को तलाश कर सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया।
आर.के. पुरम से कपासहेड़ा तक चला तलाश का अभियान
आर.के. पुरम थाना पुलिस ने एक नाबालिग बच्चे समेत चार गुमशुदा लोगों को तलाश कर परिवारों से मिलाया।
दक्षिण कैंपस थाना टीम ने दो गुमशुदा नाबालिग बच्चियों को बरामद किया। वसंत कुंज उत्तर थाना ने तीन वयस्कों को तलाश किया जबकि वसंत कुंज दक्षिण थाना ने एक नाबालिग बच्ची सहित सात लोगों को उनके परिवारों तक पहुंचाया।
कपासहेड़ा थाना की टीम ने पांच नाबालिग बच्चियों समेत कुल 16 गुमशुदा लोगों को तलाश किया। इनमें 11 वयस्क भी शामिल रहे। पालम गांव थाना पुलिस ने तीन नाबालिग बच्चों समेत 10 लोगों को तलाश कर उनके परिवारों से मिलाया। सागरपुर थाना टीम ने 12 वयस्क गुमशुदा लोगों को तलाश किया, जिनमें चार पुरुष और आठ महिलाएं शामिल थीं।
सरोजिनी नगर थाना ने दो नाबालिग बच्चों सहित छह लोगों को बरामद किया। वहीं एस.जे. एन्क्लेव थाना टीम ने दो नाबालिग बच्चों और दो पुरुषों को तलाश किया। किशनगढ़ थाना पुलिस ने एक नाबालिग बच्ची सहित छह लोगों को उनके परिवारों तक पहुंचाया।
वहीं मानव तस्करी निरोधक इकाई (एएचटीयू), दक्षिण-पश्चिम जिला ने पांच नाबालिग बच्चों और पांच वयस्कों समेत कुल 10 लोगों को तलाश कर सुरक्षित उनके परिवारों से मिलाया।
पुराने गुमशुदगी मामलों में भी मिली कामयाबी
ऑपरेशन मिलाप की खास बात यह रही कि पुलिस ने सिर्फ हाल में गुम हुए लोगों की तलाश ही नहीं की बल्कि कई ऐसे लोगों को भी खोज निकाला जो वर्षों से लापता थे। सितंबर में बरामद किए गए लोगों में 2021 से लापता एक व्यक्ति 2024 से लापता एक नाबालिग बच्चा और 2025 से लापता दो वयस्क शामिल रहे। वहीं वर्ष 2026 में गुम हुए 76 लोगों को पुलिस ने तलाश किया। इनमें 21 नाबालिग बच्चे छह लड़के और 15 लड़कियां तथा 55 वयस्क 22 पुरुष और 33 महिलाएं शामिल हैं।
नौ महीने में 1229 लोगों की घर वापसी
दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के लिए यह अभियान केवल सितंबर तक सीमित नहीं रहा। 1 जनवरी से 30 सितंबर 2026 के बीच जिला पुलिस ने कुल 1229 गुमशुदा लोगों और बच्चों को तलाश किया। इनमें 318 बच्चे और 911 वयस्क शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक इन सभी को तलाश कर सुरक्षित उनके परिवारों तक पहुंचाया गया।

खाकी की तलाश, परिवारों की मुस्कान
ऑपरेशन मिलाप ने एक बार फिर दिखाया कि गुमशुदगी का मामला सिर्फ एक पुलिस केस नहीं होता बल्कि उसके पीछे एक परिवार की बेचैनी, किसी मां की ममता और किसी पिता की उम्मीद जुड़ी होती है। दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस की टीमों ने तकनीकी निगरानी, स्थानीय पूछताछ, सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और लगातार मैदानी प्रयासों के जरिए गुमशुदा लोगों की तलाश की।पुलिस की इस मुहिम ने कई परिवारों को वह खुशी दी, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था।
Reported by: Pankaj Rai












