नई दिल्ली: नशीले पदार्थों के बढ़ते नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई और मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच को और मजबूत बनाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और पश्चिम बंगाल एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने कोलकाता में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (टीओटी) कार्यक्रम 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चला, जिसमें पश्चिम बंगाल एएनटीएफ, पश्चिम बंगाल पुलिस और कोलकाता पुलिस के जांच अधिकारियों को एनडीपीएस मामलों की पेशेवर जांच और प्रभावी प्रवर्तन के गुर सिखाए गए। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में निरीक्षक स्तर के 54 जांच अधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल अधिकारियों की जांच क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रशिक्षक के रूप में तैयार करना भी था ताकि वे अपने-अपने विभागों में अन्य पुलिसकर्मियों तक प्रशिक्षण के दौरान मिली जानकारी और आधुनिक जांच तकनीकों को पहुंचा सकें।
तलाशी से लेकर डिजिटल सबूत तक, जांच के हर मोर्चे पर ट्रेनिंग
पांच दिनों के दौरान अधिकारियों को मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया, नमूने लेने और दस्तावेजीकरण, पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम, जांच की आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों से जुड़े विषय प्रमुख रहे। इसके अलावा अधिकारियों को सीडीआर और आईपीडीआर विश्लेषण, वित्तीय जांच, मादक पदार्थों की तस्करी में इस्तेमाल होने वाले धन के स्रोतों की पड़ताल और प्रतिबंधित रसायनों के दुरुपयोग तथा उनके अवैध इस्तेमाल को रोकने से संबंधित पहलुओं की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान डार्कनेट के जरिए होने वाले नशे के कारोबार की जांच, सिंथेटिक ड्रग्स, गुप्त रूप से संचालित ड्रग लैब, मुकदमों की सुनवाई की निगरानी, अवैध नशीली फसलों की खेती तथा मामलों में जब्त संपत्ति के सुरक्षित निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया।
डार्कनेट से लेकर ड्रग लैब तक, हर चाल का जवाब सीख रहे जांच अधिकारी
बदलते दौर में नशे के कारोबार का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक तस्करी के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों, डार्कनेट और आधुनिक संचार तकनीकों का इस्तेमाल भी अपराधियों द्वारा किए जाने की चुनौती जांच एजेंसियों के सामने है। ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रम में अधिकारियों को तकनीकी साक्ष्यों को समझने, डिजिटल कड़ियों को जोड़ने और वित्तीय लेन-देन की जांच के माध्यम से पूरे नेटवर्क तक पहुंचने के तरीकों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि एनडीपीएस मामलों में मजबूत जांच के साथ-साथ साक्ष्यों की सही जब्ती, नमूनों की उचित प्रक्रिया, दस्तावेजीकरण और अदालत में मामले की प्रभावी पैरवी बेहद महत्वपूर्ण है। जांच की छोटी-सी कमी भी मुकदमे के परिणाम को प्रभावित कर सकती है, इसलिए अधिकारियों को जांच के प्रत्येक चरण में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
मॉक टेस्ट में परखी गई अधिकारियों की तैयारी
पांच दिवसीय प्रशिक्षण के समापन से पहले अधिकारियों के लिए एक मॉक टेस्ट आयोजित किया गया। इसके जरिए प्रशिक्षण के दौरान हासिल किए गए ज्ञान और समझ का आकलन किया गया। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को कार्यक्रम के समापन समारोह में सम्मानित किया गया। पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने मॉक टेस्ट में शीर्ष स्थान हासिल करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया और प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर संबोधित किया। उनके संबोधन के साथ पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ।
अब एक प्रशिक्षित अधिकारी, कई पुलिसकर्मियों को देगा नई तकनीक की सीख
टीओटी कार्यक्रम की सबसे अहम विशेषता यह रही कि इसमें शामिल अधिकारियों को भविष्य में अपने-अपने विभागों में अन्य पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार किया गया। इससे प्रशिक्षण का प्रभाव केवल 54 अधिकारियों तक सीमित न रहकर संबंधित पुलिस इकाइयों के अन्य जांच अधिकारियों तक भी पहुंच सकेगा। एनसीबी और पश्चिम बंगाल एएनटीएफ की इस संयुक्त पहल को एनडीपीएस मामलों की जांच में पेशेवर क्षमता, तकनीकी समझ और कानूनी प्रक्रियाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
Reported by: Pankaj Rai












